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    अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई पर हाई कोर्ट सख्त, लखनऊ के DM और ADM पर लगा जुर्माना

    Updated: Sat, 23 May 2026 11:22 PM (IST)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई करने पर जिलाधिकारी लखनऊ और एडीएम (न्यायिक) पर 20-20 हजार रुपये का व्यक्तिगत ...और पढ़ें

    अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई पर हाई कोर्ट सख्त।

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    विधि संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई करने पर जिलाधिकारी लखनऊ और एडीएम (न्यायिक) पर 20-20 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि दोनों अधिकारियों ने बिना वैधानिक अधिकार के कार्यवाही कर याची को अनावश्यक रूप से परेशान किया।

    न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने यह आदेश निवास कालोनाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया। कोर्ट ने एडीएम (न्यायिक) द्वारा 10 मार्च को पारित उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें कंपनी को विवादित भूमि बेचने और निर्माण कार्य करने से रोक दिया गया था।

    याचिका में कहा गया था कि एक अधिवक्ता आर पी सिंह, जिसका विवादित भूमि से कोई संबंध नहीं था, ने पहले कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा और बाद में जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत दाखिल कर दी।

    शिकायत में आरोप लगाया गया था कि भूमि का हस्तांतरण अवैध तरीके से हुआ है और उस पर निर्माण कार्य किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने शिकायत को सीधे दर्ज कर एडीएम (न्यायिक) को भेज दिया, जिन्होंने बिना प्रथमदृष्टया संतोष दर्ज किए अंतरिम आदेश पारित कर दिया।

    कोर्ट ने कहा कि यूपी राजस्व संहिता की धारा 104 और 105 के तहत कार्यवाही केवल उपजिलाधिकारी (एसडीएम) द्वारा ही शुरू की जा सकती है। नियम 103 के अनुसार पहले लेखपाल की रिपोर्ट और फिर एसडीएम द्वारा पक्षकारों को नोटिस देकर सुनवाई आवश्यक है, लेकिन इस मामले में पूरी प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया।

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    पीठ ने टिप्पणी की कि संबंधित अधिवक्ता ने अपने विधिक ज्ञान का दुरुपयोग करते हुए याची को डराने और ब्लैकमेल करने का प्रयास किया। कोर्ट ने कहा कि जिलाधिकारी ने बिना अधिकार क्षेत्र के मामला दर्ज किया जबकि एडीएम (न्यायिक) ने बिना विधिक संतोष और बिना आवेदन आदेश पारित कर दिया।

    कोर्ट ने पूरी कार्यवाही और एडीएम (न्यायिक) का आदेश रद करते हुए निर्देश दिया कि जिलाधिकारी और एडीएम (न्यायिक) दोनों छह सप्ताह के भीतर अपने व्यक्तिगत खातों से 20-20 हजार रुपये की लागत अदा करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राशि सरकारी कोष से नहीं दी जाएगी।

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