नौकरी का झांसा देकर खुलवाते थे खाते, लखनऊ में तीन गिरफ्तार; करोड़ों रुपये कर चुके ट्रांसफर
Lucknow Crime News: खातों की पूरी जानकारी टेलीग्राम के जरिए विदेशी साइबर ठगों, विशेषकर चीनी नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंचाई जाती थी। साइबर ठगी की रक ...और पढ़ें

आरोपितों में बदायूं निवासी वरुण कांत शर्मा, फर्रुखाबाद निवासी प्रेम कुमार उर्फ विमल और एक महिला शामिल
HighLights
पांच लाख रुपये फ्रीज, 23 एटीएम कार्ड, 13 पासबुक और नौ चेकबुक बरामद
हजरतगंज पुलिस ने किया राजफाश, गिरोह में शामिल अन्य ठगों की तलाश जारी
जागरण संवाददाता, लखनऊ। साइबर ठगी के लिए बैंक खातों की व्यवस्था करने वाले गिरोह का राजफाश करते हुए गुरुवार को हजरतगंज पुलिस ने तीन ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपित नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे।
इसके बाद खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और मोबाइल नंबर का पूरा नियंत्रण अपने कब्जे में लेकर साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे। इन्हीं खातों में साइबर ठगी की रकम मंगाकर तत्काल निकाल ली जाती थी। पुलिस ने आरोपितों के खातों में मौजूद पांच लाख रुपये फ्रीज कराने के साथ 23 एटीएम कार्ड, 13 पासबुक, नौ चेकबुक और पांच मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
सहायक पुलिस आयुक्त(एसीपी) हजरतगंज रजनीश वर्मा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों में बदायूं निवासी वरुण कांत शर्मा, फर्रुखाबाद निवासी प्रेम कुमार उर्फ विमल और एक महिला शामिल हैं। पुलिस अब गिरोह के दो अन्य फरार सदस्यों अमित और दिनेश सिंह की तलाश कर रही है।
जांच में सामने आया कि गिरोह गांव और कस्बों के बेरोजगार युवाओं को नौकरी का लालच देता था। इसके बाद उनके नाम पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाकर एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी, सिम कार्ड और अन्य बैंकिंग दस्तावेज अपने कब्जे में ले लेता था। कई मामलों में आधार कार्ड पर पता बदलवाकर नए मोबाइल नंबर के जरिए खाते खुलवाए गए, ताकि पहचान छिपाई जा सके।
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पूछताछ में प्रेम कुमार ने बताया कि खातों की पूरी जानकारी टेलीग्राम के जरिए विदेशी साइबर ठगों, विशेषकर चीनी नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंचाई जाती थी। साइबर ठगी की रकम खातों में आते ही उसे एटीएम या चेक के माध्यम से निकाल लिया जाता था।
इसके बाद रकम को यूएसडीटी के माध्यम से विदेशी नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था। इस पूरे काम के बदले गिरोह के सदस्यों को कमीशन मिलता था। वरुण कांत शर्मा और महिला आरोपित ने पूछताछ में बताया कि उन्हें नौकरी दिलाने के नाम पर इस काम में लगाया गया था। दोनों का काम अपने खाते में आए रुपये निकालकर प्रेम कुमार को देना था।
इसके बदले उन्हें हर महीने 40 से 45 हजार रुपये दिए जाते थे। एसीपी ने बताया कि गिरोह ठगी के लिए म्यूल खाते तैयार करने का काम करता था। ऐसे खाते साइबर अपराधियों के लिए सबसे अहम कड़ी होते हैं, क्योंकि इन्हीं के माध्यम से ठगी की रकम इधर-उधर कर जांच एजेंसियों से बचने की कोशिश की जाती है।
एसीपी ने बताया कि आरोपितों के कब्जे से 23 एटीएम कार्ड, 13 पासबुक, नौ चेकबुक और पांच मोबाइल फोन बरामद किए हैं। साथ ही गिरोह से जुड़े खातों में मौजूद पांच लाख रुपये फ्रीज करा दिए गए हैं। पुलिस अब फरार आरोपितों की तलाश के साथ यह भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क के माध्यम से कितनी साइबर ठगी की रकम का लेन-देन हुआ और इसमें अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
करोड़ो रुपये कर चुके ट्रांसफर
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपितों ने बहुत खाते खुलवाए हैं। यह खाते खुलते ही सारा डाटा अपने पास रख लेते हैं। फिर ठगों को संपर्क कर उन्हें डिटेल देते हैं, ताकि वह रकम मंगवा सके। अबतक गिरोह करोड़ो रुपये खातों में मंगाकर अपना कमीशन ले चुका है।