गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा लेकर लखनऊ पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, नहीं मिली गौ गर्जन अक्षौहिणी संकल्प सम्मेलन की अनुमति
Swami Avimukteshwaranand: सम्मेलन की अनुमति न मिलने के बाद उन्होंने गोसेवकों से अपील की कि वे शुक्रवार को दोपहर 12 बजे से दो बजे जहां हैं वहीं से मेरा ...और पढ़ें

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
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गाय को राष्ट्रमाता घोषित करे सरकार: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
गौ गर्जन अक्षौहिणी संकल्प सम्मेलन को इंटरनेट मीडिया से लाइव करेंगे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
जागरण संवाददाता, लखनऊ। ज्योतिर्मठ पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गुरुवार को गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा (गविष्ठि) लेकर लखनऊ पहुंचे। लखनऊ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का शुक्रवार को आशियाना के मान्यवर कांशी राम समृति उपवन में “गौ गर्जन अक्षौहिणी संकल्प” सम्मेलन होना है, लेकिन सरकार से इस कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिली है। अब इसको इंटरनेट मीडिया से लाइव करने की व्यवस्था है।
ज्योतिर्मठ पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गुरुवार को प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा कि श्रीराम को भगवान न मानने वाले श्रीराम मंदिर ट्रस्ट में भागीदार बने हैं। वहां पर चंदा चोरी के बावजूद उन्हें बाहर नहीं किया जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर बच्चे अपना हक मांग रहे हैं तो उन पर लाठियां बरसाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि गाय की रक्षा के लिए चल रही मेरी यात्रा को बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है। गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर शुक्रवार को आशियाना के मान्यवर कांशी राम समृति उपवन में ''गौ गर्जन अक्षौहिणी संकल्प'' के नाम से होने वाले सम्मेलन की अनुमति न मिलने के बाद उन्होंने गोसेवकों से अपील की कि वे शुक्रवार को दोपहर 12 बजे से दो बजे जहां हैं वहीं से मेरा वक्तव्य को सुने। राजधानी आने की जरूरत नहीं है।
स्वामी ने प्रदेश सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गोरक्षा के लिए निकाली गई उनकी 81 दिवसीय गविष्ठि (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा को लगातार बाधित किया गया। यात्रा के दौरान कई स्थानों पर रात्रि विश्राम की अनुमति नहीं दी गई, जिसके कारण उन्हें और श्रद्धालुओं को कई बार सड़क पर खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ी।
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राजधानी आने वाले कई कार्यकर्ताओं को घरों में नजरबंद किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर बुलडोजर चलाने और बिजली काटने जैसी चेतावनियां दी गईं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कार्यक्रम के लिए विधिवत अनुमति ली गई है तो फिर प्रशासन का यह रवैया क्यों अपनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के मौजूदा हालात ''रामराज'' की अवधारणा के विपरीत दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि गो माता की रक्षा की मांग करने वालों को ही प्रताड़ित किया जाएगा तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई है और सरकार से गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग की गई है। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट को भी कानूनी नोटिस भेजा गया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट को स्पष्ट करना होगा कि स्वामी सरस्वती को समिति में किस आधार पर शामिल किया गया। इस विषय पर ट्रस्ट को जवाब देना ही होगा, क्योंकि यह केवल व्यक्ति का नहीं बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता का सवाल है।