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    मुड़िया पूर्णिमा मेला: सोना-हीरे-मोती के आभूषण और सुगंधित पुष्पों में दर्शन देंगे गिरिराज जी, पांच दिन दिव्य श्रृंगार

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 10:26 AM (IST)

    ब्रज के सबसे बड़े मुड़िया पूर्णिमा मेले में 25 से 29 जुलाई तक गिरिराजजी पांचों दिन स्वर्णाभूषणों, हीरे-मोती और सुगंधित पुष्पों से दिव्य शृंगार में दर् ...और पढ़ें

    गोवर्धन स्थित दानघाटी मंदिर में गिरिराजजी को 56 भोग समर्पित करते सेवायत रामेश्वर पुरोहित। जागरण आर्काइव

    गोवर्धन स्थित दानघाटी मंदिर में गिरिराजजी को 56 भोग समर्पित करते सेवायत रामेश्वर पुरोहित। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. मुड़िया पूर्णिमा मेला 25 से 29 जुलाई तक गोवर्धन में

    2. गिरिराजजी पांच दिन स्वर्णाभूषणों, पुष्पों से दिव्य शृंगार

    3. मानसीगंगा, मंदिर परिसर आकर्षक विद्युत सज्जा से जगमगाएगा

    संवाद सूत्र, गोवर्धन (मथुरा)। ब्रज के सबसे बड़े आस्था पर्व मुड़िया पूर्णिमा मेला में इस बार गिरिराज धाम की छटा अलौकिक होगी। मानसीगंगा तट पर विराजमान मुकुट मुखारविंद गिरिराजजी पांचों दिन स्वर्णाभूषणों, हीरे-मोती और सुगंधित पुष्पों के दिव्य शृंगार से भक्तों को दर्शन देंगे। स्वर्णिम आभा में सजे गिरिराज प्रभु और पुष्प महल की अनुपम सज्जा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगी। 

    25 से 29 जुलाई तक आयोजित होने वाले मेले में सात कोसीय परिक्रमा मार्ग पर आस्थावानों की भीड़ उमड़ेगी। दानघाटी मंदिर और मानसीगंगा स्थित मुकुट मुखारविंद मंदिर मेले का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र रहेगा। सेवायतों ने पांचों दिन अलग-अलग दिव्य शृंगार और विशेष भोग की विस्तृत व्यवस्था की है।

    मुड़िया पूर्णिमा मेले में पांच दिन दिव्य शृंगार

    दानघाटी मंदिर के सेवायत रामेश्वर पुरोहित, दीपू पुरोहित एवं रवि पुरोहित ने बताया कि प्रभु के मस्तक पर कस्तूरी का तिलक और ठोढ़ी पर लाल हीरा सुशोभित होगा। माणिक, मोती और स्वर्णाभूषणों से अलंकृत पोशाक प्रभु के दिव्य स्वरूप को और भव्य बनाएगी। प्रतिदिन प्रातःकाल पंचामृत अभिषेक के बाद शाम को विभिन्न प्रजातियों के सुगंधित पुष्पों से पुष्प महल सजाया जाएगा, जिसकी छटा श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देगी।

    संपूर्ण मंदिर परिसर रंग-बिरंगी विद्युत सज्जा से जगमगाएगा

    मुकुट मुखारविंद मंदिर के रिसीवर कपिल चतुर्वेदी ने बताया कि मंदिर तक जाने वाले लगभग एक किलोमीटर मार्ग को आकर्षक रोशनी से सजाया जा रहा है। संपूर्ण मंदिर परिसर रंग-बिरंगी विद्युत सज्जा से जगमगाएगा, जिससे मेले की भव्यता कई गुना बढ़ जाएगी। यह दिव्य स्वर्ण शृंगार वर्ष में केवल मुड़िया पूर्णिमा, दीपावली, जन्माष्टमी और गोवर्धन पूजा जैसे विशेष अवसरों पर ही कराया जाता है।

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    मानसीगंगा की लहरों पर बिखरेगी रोशनी की छटा

    मंदिर से सटे मानसीगंगा के घाटों को भी आकर्षक विद्युत सज्जा से संवारा जा रहा है। रंग-बिरंगी रोशनी का प्रतिबिंब कुंड की लहरों पर अद्भुत दृश्य रचेगा, जबकि फव्वारों की फुहारें इस अलौकिक वातावरण में चार चांद लगाएंगी। श्रद्धालुओं को इस बार आस्था, भक्ति और सौंदर्य का दुर्लभ संगम देखने को मिलेगा।

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