'आईआईटियन बाबा' के प्रभाव से कई युवतियों ने छोड़ दी थी नौकरी, वैज्ञानिक नजरिया देख जुड़ जाते थे युवा
आईआईटी रुड़की से पढ़े अभिषेक मिश्रा, जो खुद को आदिकर्ता नारायण दास कहते थे, मथुरा में गिरफ्तार हुए हैं। उन पर युवतियों को कृष्ण अवतार बताकर प्रभावित क ...और पढ़ें

'आईआईटियन बाबा' के प्रभाव में कई युवतियों ने छोड़ दी थी नौकरी।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, मथुरा। आश्रम में आईआईटियन बाबा अभिषेक मिश्रा का रंग पूरी तरह कृष्णमय हो जाता था। वह ढोलक बजाता, भजन गाता और प्रवचन करता। वह कृष्ण से साक्षात्कार कराने का झांसा भी देता था। उसका प्रभाव इस कदर था कि कई युवतियां तो निजी कंपनियों की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर गोवर्धन में ही रहने लगी थीं। कई युवतियां महीनों तक आश्रम में रहती थीं।
बाबा ने आईआईटी की बैकग्राउंड का बखूबी उपयोग किया। वह बोलने से पहले अध्ययन करता था। आवश्यकता होने पर वैज्ञानिक नजरिया भी जोड़ता था। इससे प्रभावित होकर युवा जल्द उसके शिष्य बन जाते थे।
बाबा के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की भनक लगते ही कई युवक-युवतियां मंगलवार को ही गोवर्धन से चले गए। एक युवती की शिकायत पर बाबा को गिरफ्तार किया गया था। मूलरूप से भुवनेश्वर निवासी अभिषेक मिश्रा ने आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियर की डिग्री ली थी।
दो वर्ष तक नौकरी की। 2023 में संन्यास ले लिया और अपना नाम आदिकर्ता नारायण दास रख लिया। राधाकुंड में आश्रम बनाया। उसने इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े युवक-युवतियों में अच्छा नेटवर्क खड़ा किया। उसका बोलने का तरीका प्रभावी था। युवाओं को बाबा के प्रवचन, वीडियो और ऑनलाइन बैठकों से जोड़ा जाता था।
युवाओं को विश्वास दिलाने की कोशिश रहती थी कि अभिषेक दिव्य शक्तियों के स्वामी है। वह कलयुग के कृष्णावतार हैं। पुलिस जांच के अनुसार जो युवतियां शुरुआत में बाबा के शिष्यों के दावों पर विश्वास नहीं करती थीं, उन्हें लगातार संवाद और तथाकथित आध्यात्मिक तर्कों के माध्यम से प्रभावित किया जाता था।