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    चरित्र, शोध और तकनीक से बनेगा विकसित भारत, नशे से दूर रहें युवा; CCSU में राज्यपाल ने छात्रों को किया प्रेरित

    By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Wed, 22 Jul 2026 01:16 PM (IST)

    राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सीसीएसयू के दीक्षांत समारोह में युवाओं से चरित्र निर्माण, शोध और नशामुक्त जीवन अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नैतिक ...और पढ़ें

    चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रा को उपाधि प्रदान करतीं राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल।

    चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रा को उपाधि प्रदान करतीं राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल।

    HighLights

    1. सीसीएसयू के 38वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति का आह्वान

    2. नैतिक मूल्यों व शिक्षा से ही विकसित भारत का सपना होगा साकार।

    जागरण संवाददाता, मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) के 38वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने युवाओं से चरित्र निर्माण, नशामुक्त जीवन, शोध और नवाचार को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब युवा नैतिक मूल्यों के साथ शिक्षा प्राप्त कर समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि डिग्री से अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति का चरित्र होता है और यही उसकी वास्तविक पहचान बनाता है।

    राज्यपाल ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है, जो मानवता और राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित हों। उन्होंने कहा कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह युवाओं के सपनों, प्रतिभा, स्वास्थ्य और परिवार की उम्मीदों को नष्ट कर देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से 'विकसित भारत युवा कनेक्ट कार्यक्रम' से जुड़कर नशामुक्त भारत के संकल्प को मजबूत करने की अपील की।

    प्रयोगशाला से समाज तक पहुंचे शोध

    राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की शोध उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि सीसीएसयू के शोधकर्ताओं ने 10 हजार से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं, जिन्हें 1.60 लाख से अधिक बार उद्धृत किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि शोध और नवाचार का लाभ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका प्रभाव समाज और उद्योग तक दिखाई देना चाहिए। विद्यार्थियों से वैज्ञानिक सोच विकसित करने और नवाचार आधारित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

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    डिजिलाकर अपनाने की अपील

    राज्यपाल ने उच्च शिक्षा संस्थानों में डिजिटल व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को अपनी डिग्रियां डिजिलाकर के माध्यम से प्राप्त करने के लिए जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में विश्वविद्यालय ने 1.03 लाख से अधिक डिग्रियां डिजिल्लाकर पर अपलोड कीं, लेकिन केवल लगभग 2.5 प्रतिशत विद्यार्थियों ने उन्हें डाउनलोड किया। वर्ष 2023-24 और 2024-25 में भी डाउनलोड का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा। उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था अपनाने से समय, धन और सरकारी संसाधनों की बचत होगी और विद्यार्थियों को कहीं से भी अपनी डिग्री प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी।

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    राज्यपाल ने स्वच्छता को सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से होनी चाहिए। उन्होंने 'वोकल फार लोकल' और 'लोकल टू ग्लोबल' की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है। साथ ही हाइड्रोजन ऊर्जा आधारित ट्रेन और विमान जैसी नई तकनीकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।