दारोगा बनने से एक नंबर से चूकने और कांस्टेबल भर्ती में सफल नहीं होने पर युवती ने फांसी लगाकर दी जान
Meerut News: कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में असफल होने के कारण डिप्रेशन में आई मेरठ निवासी युवती रजनी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। ...और पढ़ें

रजनी का फाइल फोटो और प्रतीकात्मक फोटो।
HighLights
कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में असफल होने पर डिप्रेशन में आ गई थी युवती।
परिवार को वर्दी पहनकर गांव लौटने का दिया था भरोसा।
जागरण संवाददाता, मेरठ। कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में असफल होने के कारण डिप्रेशन में आई एक युवती ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जान देने से पहले उसने परिवार के सभी सदस्यों से फोन पर बातचीत की थी। इससे पहले भी वह दारोगा भर्ती परीक्षा में भी महज एक नंबर से असफल हो गई थी।
फलावदा के भलसोना गांव के सुशील कुमार की 27 वर्षीय पुत्री रजनी पिछले एक साल से तिलक रोड स्थित देवेंद्र छाबड़ा के मकान में रह रही थी। देवेंद्र ने बताया कि सुबह से रजनी का फोन लगातार मिलाया जा रहा था, लेकिन उसने काल रिसीव नहीं की। दोपहर करीब दो बजे जब वह कमरे पर पहुंचे तो दरवाजा खोलने पर रजनी का शव पंखे से लटका मिला। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। लालकुर्ती थाना पुलिस फोरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंची।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि रजनी लंबे समय से यूपी पुलिस की भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। उसने पहले दारोगा भर्ती परीक्षा दी थी, जिसका रिजल्ट 14 जुलाई को आया था। वह एक नंबर कम होने के कारण सफल नहीं हो सकी थी। इसके बाद उसने महिला कांस्टेबल भर्ती परीक्षा दी। एक अगस्त को रिजल्ट आया तो इसमें भी वह सफल नहीं हो सकी। इसी कारण वह तनाव में आ गई थी।
रिजल्ट के बाद वह परिवार से बातचीत कर रही थी और उन्हें बता रही थी कि वह डिप्रेशन में है। परिवार के सदस्यों ने उसे फोन पर समझाने की कोशिश की लेकिन रविवार को उसने आत्महत्या कर ली।
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वर्दी पहनकर गांव लौटना चाहती थी
रजनी आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से थी और सरकारी नौकरी को अपने परिवार की स्थिति बदलने का सबसे बड़ा सहारा मानती थी। उसने परिवार को भरोसा दिलाया था कि वह पीएल शर्मा रोड के कोचिंग सेंटर से तैयारी कर रही है और वर्दी पहनकर ही गांव लौटेगी। दो परीक्षाओं में असफल होने के बाद उसकी हिम्मत टूट गई, जिससे वह अवसाद में चली गई। थानाध्यक्ष हरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि परिवार के लोग पोस्टमार्टम के बाद शव को अपने साथ ले गए। परिवार की तरफ से कोई तहरीर नहीं दी गई है।
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माता-पिता रखें ध्यान: डा. तरुण पाल

मेडिकल कालेज में मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष डा. तरुण पाल कहते हैं कि बच्चों से माता-पिता की अपेक्षाएं बहुत होती हैं। ऐसे में जब असफलता मिलती है तो कई बार बच्चे स्वीकार नहीं कर पाते और गलत कदम उठा लेते हैं। बचपन से ही माता-पिता को बच्चों को असफल होने पर उसे स्वीकार करने के लिए कहना चाहिए। उदाहरण रखने चाहिए कि असफल होने के बाद भी लोग कामयाब होते हैं।