मुजफ्फरनगर में ANM-GNM के फर्जी सर्टिफिकेट तैयार करने वाला गिरोह दबोचा, सरगना समेत 10 आरोपी गिरफ्तार
मुजफ्फरनगर पुलिस ने एएनएम और जीएनएम के फर्जी अंकपत्र व प्रमाण-पत्र बनाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। ...और पढ़ें

एएनएम-जीएनएम के फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार करने वाला गिरोह दबोचा।
HighLights
मुजफ्फरनगर में फर्जी एएनएम जीएनएम सर्टिफिकेट गिरोह का भंडाफोड़।
सरगना सहित दस आरोपी गिरफ्तार, छह साल से सक्रिय था गिरोह।
फर्जी प्रमाण-पत्रों से कई अस्पतालों में नौकरी दिलवाई गई।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। ककरौली पुलिस ने नर्सिंग वर्ग में एएनएम और जीएनएम के फर्जी अंकपत्र, प्रमाण-पत्र बनाने वाले गिरोह का राजफाश किया है। यह गिरोह लगभग छह वर्ष से फर्जीबाड़ा कर प्रमाण-पत्र तैयार करता था।
गिरोह का सरगना समेत दस आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं। इनके कब्जे से कंप्यूटर की हार्ड डिस्क समेत अंकपत्र बनाने के उपकरण, मोबइल और बाइक बरामद की गई। फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर मेरठ, नोएडा, बिजनौर, शामली के अस्पतालों में युवक, युवतियों और महिलआों की नौकरी लगवा चुके हैं।
पुलिस लाइन सभागार में पत्रकार वार्ता में एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि शनिवार रात को जटवाड़ा पुलिस चौकी के निकट चेकिंग की जा रही थी। तभी बाइक के निकट खडे़ पांच युवकों को रूकने का इशारा किया तो वह भागने लगे। पुलिस ने पीछा कर सभी को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपितों से पूछताछ के बाद इनके पांच साथियाें को रविवार प्रात: को मेरठ स्थित न्यूटिमा हास्पिटल तथा हिम्स हास्पिटल, सिवाल जानी रोड से गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि यह गिरोह वर्ष 2020 से नर्सिंग कोर्स से जुड़े एएनएम, जीएनएम के फर्जी प्रमाण-पत्र, अंक पत्र बनाकर बेचता था।
गिरोह काम की तलाश में लगे युवाओं को यह फर्जी प्रमाण-पत्र बेच रहा था। एसएसपी ने बताया कि आरोपित ग्राहक लाने से लेकर फर्जी प्रमाण-पत्रों पर स्वयं भी नौकरी कर रहे थे। एक प्रमाण-पत्र को तैयार करने में 500 रुपये खर्च करते थे, जबकि चार हजार रुपये में सप्लाई करते थे। उसके बाद ग्राहकों से उसी प्रमाण-पत्र के 25 हजार रुपये वसूलते थे।
पिछले पांच वर्ष में लगभग 60 से अधिक लोगों को फर्जी एएनएम, जीएनएम के अंकपत्र, डिप्लोमा को बेच चुके हैं। सभी प्रमाण-पत्रों को मेरठ के जानी खुर्द में स्थित विधू कंप्यूटर सेन्टर पर तैयार किए जाते थे।
जिनके बलबूते युवा, युवती और महिलाएं मेरठ, नोएडा, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, शामली समेत महाराष्ट्र राज्य में प्रसिद्ध अस्पतालों में वार्ड ब्वाय, नर्सिंग स्टाफ के पदों पर नौकरी कर रहे हैं।
अस्पतालों से लेकर गिरोह की कुंडली खंगालने के लि एसओजी के साथ पुलिस की कई टीम और चिकित्सकीय प्रणाली के विशेषज्ञों की टीम लगाई गई है। यह प्रदेशभर का बड़ा नेटवर्क सामने आएगा।
ये आरोपित किए गए गिरफ्तार
- शिवानन्द पुत्र यशपाल व मनीष पुत्र सलेकचंद निवासी ग्राम तुल्हेडी, मीरापुर, मुजफ्फरनगर।
- इस्माईल पुत्र सुफी हसनैन, आदिल पुत्र युनूस निवासी मीनार मस्जिद समर गार्डन, लिसाडी गेट मेरठ।
- कुलदीप कुमार पुत्र राजकुमार निवासी ग्राम जानी खुर्द, जानी, मेरठ।
- रितेश पुत्र रामअवतार जाटव निवासी लाला मुहम्मदपुर, कंकडखेडा, मेरठ।
- जयन्त भारती पुत्र स्व. किरनपाल निवासी मुहल्ला बसी, बहसूमा, मेरठ।
- सचिन पाल पुत्र जसवन्त सिंह निवासी ग्राम तिसंग, जानसठ, मुजफ्फरनगर।
- सन्दीप कुमार पुत्र राजपाल सिंह जाटव निवासी ग्राम सराय मोड़ राजवंश बिहार गढ़ रोड थाना मेडिकल, मेरठ।
- नितेश पुत्र चतर सिंह जाटव निवासी ग्राम सिवाल खास, जानी, मेरठ।
प्रत्येक सदस्य को सौंपा गया था काम
एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि पूछताछ में आरोपित कुलदीप ने बताया कि वह पिछले लगभग 18 माह से जानी खुर्द में स्थित अपने विधू कंप्यूटर सेंटर पर कार्य कर रहा था। उसे इस्माईल उसे ग्राहकों का डाटा उपलब्ध कराता था। इसके आधार पर ही फर्जी रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्र, नर्सिंग एवं एएएन, जीएनएम के डिप्लोमा, मार्कशीट समेत शैक्षिक दस्तावेज तैयार करते थे।
इन प्रमाण-पत्रों पर आदिल क्यूआर कोड अंकित करता था। कुलदीप को प्रति मार्कशीट, प्रमाण-पत्र पर 500 रुपये मिलते थे। जिन्हें इस्माईल एवं आदिल अपने साथी शिवानन्द एवं मनीष को लगभग हजार रुपये बेचते थे। इसके बाद शिवानन्द एवं मनीष ने ग्राहकों को लगभग 25,000 रुपये आगे बेचते थे।
अस्पतालों में नौकरी कर रहे थे पांच आरोपित
पकड़े गए गिरोह के पांच आरोपित रितेश, जयंत, सचिन, संदीप और नितेश विभिन्न अस्पतालों में नौकरी कर रहे थे। यह सभी लोग हाईस्कूल और इंटरमीडिया उत्तीर्ण हैं, जो फर्जी एएनएम और जीएनएम का डिप्लोमा लगाकर वार्ड ब्वाज, मरीज अटेंडेन्ट से लेकर देखभालकर्ता की नौकरी कर रहे थे।
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