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    Exclusive: हजारों साल पुरानी भारतीय पांडुलिपियों के खुलेंगे रहस्य, GBU में जुटकर दुनिया भर के विशेषज्ञ करेंगे 'डिकोड'

    Updated: Wed, 15 Jul 2026 07:00 AM (IST)

    गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में 24 से 26 जुलाई तक भारतीय ज्ञान परंपरा पर द्वितीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होगा, जहां दुनियाभर के विशेषज्ञ पां ...और पढ़ें

    गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू)

    गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू)

    HighLights

    1. जीबीयू में 24-26 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय ज्ञान सम्मेलन।

    2. दुनियाभर के विशेषज्ञ करेंगे पांडुलिपियों के ज्ञान की डिकोडिंग।

    3. भारतीय ज्ञान परंपरा पर 250 शोधपत्र प्रस्तुत होंगे।

    आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में 24 से 26 जुलाई तक दुनियाभर से जुट रहे विशेषज्ञ पांडुलिपि के ज्ञान में छिपे खजाने की डिकोडिंग की जाएगी। सम्मेलन के दौरान दर्शन, आयुर्वेद, वास्तुकला, बौद्ध अध्ययन, नीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, धर्मशास्त्र, इतिहास एवं पुराण, ज्योतिष, गणित, विज्ञान एवं अभियांत्रिकी, समाज एवं संस्कृति, भाषाविज्ञान, व्याकरण और नाथपंथ सहित भारतीय ज्ञान परंपरा के अनेक विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।

    अनुसंधान ढांचों पर भी विचार-विमर्श

    इस संबंध में बताया गया है कि उन पर सभी अपने विचार व्यक्त करने के साथ होने वाले भ्रम को खत्म करने की कोशिश की जाएगी। सम्मेलन में समकालीन वैश्विक चुनौतियों के समाधान हेतु भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित नए सिद्धांतों और अनुसंधान ढांचों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

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    वैश्विक अकादमिक सहयोग को मिलेगी नई दिशा

    जीबीयू में भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) विषय पर द्वितीय वार्षिक अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सम्मेलन का आयोजन होगा। सम्मेलन का विषय आइकेएस : री वीविंग द थ्रेड्सऑफनाॅलेज रखा गया है। सम्मेलन जीबीयू और आइकेएस एंड हेरिटेज एसोसिएशन (इक्शा ) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इस तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शोध, विमर्श और वैश्विक अकादमिक सहयोग को नई दिशा प्रदान करना है।

    समकालीन वैश्विक चुनौतियों का समाधान

    सम्मेलन में शोध पद्धति कार्यशाला, जर्नल संपादकों के साथ संवाद, पैनल चर्चा, प्लेनरी व्याख्यान तथा विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

    सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले शोध को प्रोत्साहित करना, युवा शोधकर्ताओं को अनुभवी शिक्षाविदों से जोड़ना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विषयों के बीच अंतः विषयक सहयोग को बढ़ावा देना है।

    सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल ऐतिहासिक विरासत के रूप में नहीं, बल्कि समकालीन वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए एक सशक्त बौद्धिक एवं व्यावहारिक ज्ञान प्रणाली के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

    यह शिक्षाविद पांडुलिपि की करेंगे डिकोडिंग

    दो दिवसीय सम्मेलन में राष्ट्रीय अनुसंधान आयुष के प्रो. भूषण पटवर्धन, अमेरिका के स्टोनी ब्रुक विश्वविद्यालय से प्रो. स्थानेश्वर तिमलसिना, यूनिवर्सिटी ऑफ सैन फ्रांसिस्को के प्रो. वंशी जुलुरी, आइआइटी मद्रास के प्रो. ज्योतिर्मय त्रिपाठी, डाॅ. गिरीश्वर मिश्र, डाॅ. प्रकाश शाह, प्रो. पी राममनोहर, प्रो. गेशे नगवांग समतें , प्रो सुशील मित्तल (जेम्स मैडिसन यूनिवर्सिटी), प्रो रामानंद, प्रो सीएस योगानंद समेत कई शिक्षाविद शामिल होंगे।

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    लगभग 250 शोधपत्रों का चयन किया गया

    सम्मेलन के मौके पर शिक्षाविद पांडुलिपि पर डिकोडिंग करेंगे। सम्मेलन के लिए प्राप्त शोधपत्रों का चयन दो चरणों की कठोर प्रक्रिया तथा सिंगल-ब्लाइंड पीयर रिव्यू के माध्यम से किया गया है। सम्मेलन के लिए 350 से अधिक विस्तारित सार (एक्सटेंडेड ऐब्सट्रक्ट्स) प्राप्त हुए, जिनमें से लगभग 250 शोधपत्रों का चयन किया गया।

    "जीबीयू में 24 से 26 जुलाई तक पांडुलिपि की डिकोडिंग करने के लिए दुनियाभर के विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। साथ ही हमारी अन्य पुरानी भारतीय परंपराओं पर चर्चा की जाएगी। इसके लिए 250 शोध पत्रों को चयनित किया गया है।"

    -प्रो. राणा प्रताप सिंह, कुलपति, जीबीयू।

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