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    नोएडा एयरपोर्ट एलिवेटेड एक्सप्रेसवे परियोजना ने भरी उड़ान, 22 गांवों की जमीन NHAI को देगा प्राधिकरण

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 07:37 PM (GMT+05:30)

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक तेज कनेक्टिविटी के लिए 50 किमी लंबे एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का निर्माण होगा। नोएडा प्राधिकरण इसके लिए अपने क्षेत्र के 22 गांव ...और पढ़ें

    एआई जेनेरेटेड इमेज।

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    HighLights

    1. नोएडा एयरपोर्ट के लिए 50 किमी लंबा एलिवेटेड एक्सप्रेसवे।

    2. नोएडा प्राधिकरण 22 गांवों की जमीन एनएचएआई को देगा।

    3. परियोजना की अनुमानित लागत लगभग चार हजार करोड़ रुपये।

    जागरण संवाददाता, नोएडा। जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक तेज कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बनने वाले एलिवेटेड एक्सप्रेसवे की प्रक्रिया में तेजी आई है। नोएडा प्राधिकरण अपने क्षेत्र के 22 गांवों की जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) को प्रदान करेगा।

    इस जमीन पर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के पिलर स्थापित किए जाएंगे। लगभग 50 किलोमीटर लंबे इस एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का लगभग 27 किलोमीटर हिस्सा नोएडा में आएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग चार हजार करोड़ रुपये है। पूरा एक्सप्रेसवे छह लेन का होगा।

    एयरपोर्ट के लिए बेहतर सड़क संपर्क प्राथमिकता

    परियोजना का अलाइनमेंट सेक्टर-44, सेक्टर-99, सेक्टर-101, सेक्टर-109 के अलावा वाजिदपुर, झट्टा, बदौली बांगर, कोंडली, गढ़ी, मोमनाथन समेत 22 गांवों से होकर गुजरेगा। ग्रेटर नोएडा के तीन गांव भी इस परियोजना में शामिल होंगे।

    नोएडा प्राधिकरण सीईओ कृष्णा करुणेश ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए बेहतर सड़क संपर्क हमारी प्राथमिकता है।

    एनएचएआइ को आवश्यक जमीन निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके और दिल्ली-एनसीआर के लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके। सिंचाई विभाग से अनुमति नहीं मिलने के कारण अलाइनमेंट में बदलाव किया गया है।

    NHAI करेगा रखरखाव

    अब एलिवेटेड एक्सप्रेसवे को यमुना तटबंध से करीब पांच मीटर दूर नोएडा की ओर बनाया जाएगा। यह यमुना प्राधिकरण सेक्टर-22 ई में बनी 120 मीटर चौड़ी सड़क से भी जुड़ेगा। एक्सप्रेसवे बनने के बाद मयूर विहार, अक्षरधाम, पड़पड़गंज, कालिंदी कुंज और सरिता विहार के लोगों की एयरपोर्ट तक यात्रा आसान होगी।

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    मंझावली पुल के माध्यम से फरीदाबाद और हरियाणा के लोगों को भी सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। अलाइनमेंट फाइनल होने के बाद अब डीपीआर तैयार की जा रही है, इसके बाद स्वायल टेस्ट होगा ताकि निर्माण से पहले मिट्टी की भार क्षमता का आकलन किया जा सके।

    परियोजना का निर्माण और भविष्य का रखरखाव एनएचएआइ करेगा।

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