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    जब 16 हेक्टेयर जमीन के कारण फंस गया था Noida Airport का रनवे, दिलचस्प है इसके निर्माण की कहानी

    Updated: Tue, 07 Apr 2026 09:30 AM (IST)

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे निर्माण की कहानी रोचक है। 3900 मीटर लंबे रनवे के लिए कुरैब गांव की 16 हेक्टेयर जमीन बाधा बन रही थी, जो अधिगृहीत नहीं ...और पढ़ें

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का रनवे। फोटो- जागरण

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का रनवे। फोटो- जागरण

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    जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) का लोकार्पण 28 मार्च को हो चुका है, एयरपोर्ट से विमान सेवा शुरू होने का इंतजार हो रहा है, लेकिन जिस रनवे पर विमान उतरेंगे और उड़ान भरेंगे।

    इसके निर्माण की कहानी भी कम रोचक नहीं है। 3900 मीटर लंबे रनवे के निर्माण के लिए अधिकारियों को पसीने बहाने पड़े थे। यीडा ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की शुरुआती रूपरेखा पीडब्ल्यूसी से तैयार कराई थी।

    Noida Airport (4)

    यीडा अधिकारियों ने कैसे निकाला रास्ता?

    एजेंसी ने 1334 हे. अधिगृहीत जमीन के हिसाब से एयरपोर्ट के मानचित्र का खाका खींच दिया, इसके आधार पर जमीन का अधिग्रहण भी कर लिया गया, लेकिन एयरपोर्ट की निविदा हासिल करने के बाद ज्यूरिख एजी इंटरनेशनल एजी ने एयरपोर्ट का मानचित्र तैयार कर उसे अधिगृहीत जमीन पर सुपर इंपोज किया तो एयरपोर्ट के प्रस्तावित रनवे और टैक्सी वे की जमीन के निर्देशांक गड़बड़ा गए।

    कुरैब गांव की करीब 16 हेक्टेयर जमीन रनवे और टैक्सी वे में आ गई जो कि अधिगृहीत भी नहीं की गई थी। रनवे के निर्माण के लिए यह जमीन जरूरी थी, लेकिन अधिग्रहण करने में लंबी प्रक्रिया का सामना करना पड़ा।

    किसानों से जमीन खरीदने में क्या चुनौती आई?

    इसलिए यीडा अधिकारियों ने छोटा रास्ता निकाला और जमीन को किसानों की सहमति लेकर क्रय करने का फैसला किया, लेकिन जब तहसील में जमीन से जुड़े दस्तावेज खंगाले गए तो दूसरी चुनौती सामने आई, जमीन के करीब 370 मालिक में अधिकर स्थानीय निवासी नहीं थे, देश के दूर दराज के लोग स्थानीय किसानों से पहले ही जमीन खरीद चुके थे।

    उनकी जमीन खरीद पर सहमति लेने के लिए यीडा के सीईओ व अन्य अधिकारियों को मशक्कत करनी पड़ी। उनके शहर तक जाकर सहमति लेनी पड़ी। हालांकि जमीन मालिकों ने सहमति देने में ज्यादा आनाकानी नहीं हुई। जमीन का बैनामा होते ही एयरपोर्ट के रनवे की बाधा दूर हो गई।

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    रनवे के बीचों बीच आ रही थी कुरैब गांव की जमीन

    यीडा और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लि. के तत्कालीन सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह का कहना है कि कुरैब गांव की कुछ जमीन रनवे के बीचों बीच आ रही थी। इसलिए इस जमीन को उसके मालिकों से लेना एयरपोर्ट निर्माण के लिए बेहद जरूरी हो गया था। कम समय में जमीन लेने के लिए क्रय करने का फैसला किया गया था। भू स्वामियों के पास जाकर जमीन क्रय पर उनकी सहमति ली गई।

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