यमुना प्रदूषण रोकने को नोएडा का एक्शन प्लान, 11 नालों पर लगाए जाएंगे एसटीपी
नोएडा प्राधिकरण यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए 11 नालों पर नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करेगा। यह योजना सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
नोएडा प्राधिकरण 11 नालों पर नए एसटीपी लगाएगा।
यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने की तैयारी तेज।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर योजना की निगरानी होगी।
चेतना राठौर, नोएडा। यमुना नदी को नोएडा क्षेत्र में प्रदूषण मुुक्त बनाने के लिए नालों पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनेंगे। नोएडा प्राधिकरण ने न्यायालय में 11 नालों पर एसटीपी बनाने की योजना सौंपी है। इन नालों पर एसटीपी बनाने और शोधित पानी ही यमुना में छोड़ने की आवश्यकता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यमुना में बिना शोधित कर पानी छोड़ने वाले उद्योग और सेक्टरों को चिह्नित करेगा। नोएडा प्राधिकरण 11 नालों पर एसटीपी लगाएगा। इनमें से पांच नालों पर एसटीपी वर्ष 2027 तक और छह नालों पर दिसंबर 2028 तक बनकर तैयार होंगे।
कुल 24 नालों में से आठ को ट्रैप किया
एसटीपी के माध्यम से नालों से आने वाले गंदे पानी का शोधन किया जाएगा। उपचारित पानी को ही आगे नदी में छोड़ा जाएगा। नोएडा में यमुना को प्रदूषण मुक्त करने में अब तक किए गए कार्य और भविष्य की योजना की रिपोर्ट यूपीपीसीबी और नोएडा प्राधिकरण की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जमा कर दी गई है।
नोएडा में प्राधिकरण ने अपने कुल 24 नालों में से आठ को ट्रैप कर दिया है और पांच नालों को फाइटो फाइकस से शोधित किया जा रहा है। बकाया 11 नालों पर एसटीपी लगाने की तैयारी की जा रही है।
खबरें और भी
वहीं, यमुना को स्वच्छ करने के लिए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली राज्यों को यमुना में मिलने वाले प्रदूषित पानी को शोधित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश किया है।
यमुना की सफाई और प्रदूषण नियंत्रण की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति की सिफारिशों के आधार पर परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
5 नालों के गंदे पानी को फाइटो फाइकस से शोधित हो रहा
नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में जल प्रदूषण से निपटने और नालियों के पानी को साफ करने के लिए प्राधिकरण द्वारा प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। जिसे आप फाइटो फाइकस कह रहे हैं, वह असल में फाइटोरिड या फाइटोरमीडिएशन तकनीक है।
उन औद्योगिक इकाइयों की पहचान करेगा, जो बिना शोधन किया हुआ अपशिष्ट जल सीधे नालों या यमुना नदी में छोड़ रही हैं। ऐसे उद्योगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रितेश कुमार तिवारी, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
11 नालों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट एसटीपी लगाया जाएगा। जिससे यमुना में गिरने वाले प्रदूषित पानी को गिरने से रोका जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट को नालों पर एसटीपी स्थापित करने रिपोर्ट दे दी गई है।
आरपी सिंह,जीएम,नोएडा प्राधिकरण