नोएडा-ग्रेटर नोएडा में खुले गड्ढे और नाले दे रहे मौत को न्योता, आखिर कब तय की जाएगी अफसरों की जवाबदेही?
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में खुले गड्ढे, अधूरे नाले और बिना बैरिकेडिंग वाली निर्माण साइटें लोगों की जान ले रही हैं। प्रशासनिक लापरवाही और निगरानी तंत्र क ...और पढ़ें

नोएडा में यही डूबने से हुई थी युवराज की मौत। फोटो: जागरण
HighLights
नोएडा-ग्रेनो में खुले गड्ढे और अधूरे नाले जानलेवा
छह माह में कई लोगों की जान जा चुकी है
लापरवाही और निगरानी तंत्र की विफलता मुख्य कारण
धर्मेंद्र चंदेल, नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा को उत्तर प्रदेश का सबसे आधुनिक, प्लांड सिटी कहा जाता है। यहां मेट्रो, एक्सप्रेसवे, शिक्षा व इंड्रस्टी हब, आईटी पार्क और हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट हैं। इसी चमक के बीच सड़कों किनारे खुले गड्ढे, अधूरे नाले और बिना बैरिकेडिंग वाली निर्माण साइटें हर दिन मौत बांट रही हैं।
इनके आसपास बुनियादी सुरक्षा नहीं है। जब तक गड्ढा भरने की जिम्मेदारी तय नहीं होगी, बैरिकेडिंग व लाइट अनिवार्य नहीं होगी, और लापरवाही पर नौकरी जाने का डर नहीं होगा, तब तक युवराज मेहता जैसे और नाम फाइलों में जुड़ते रहेंगे।
सवाल वही है आखिर लोग नाकाम सिस्टम की भेंट क्यों चढ़ रहे हैं?। असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं।सिर्फ छोटे स्तर के दैनिक वेतन भोगियों के सिर ही घटना का ठिकरा फोड़कर बड़े जिम्मेदारों को क्यों बचाया जाता है।
यदि असली एक भी जिम्मेदार पर कार्रवाई हो जाए तो निगरानी तंत्र प्रभावी ढंग से काम करने लगेगा। अन्यथा नाकाम सिस्टम की वजह से भविष्य में भी लोगों को जान गवानी पड़ सकती है।

सेक्टर-94 स्थित इसी गड्ढे में डूबकर हुई हर्षित की मौत। जागरण
रुकने का नाम नहीं ले रहे हादसे
सोमवार को पति-पत्नी थार समेत नहर में गिर गए। पत्नी की डूबने से मौत हो गई। जनवरी 2026 में सेक्टर-150 में 27 साल के साफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में भरे पानी में समा गई थी।
रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची भी, लेकिन संसाधनों के अभाव में युवराज को नहीं बचा सकी। एक महीने बाद अल्फा-एक सेक्टर के रेलवे विहार में गंगाजल पाइपलाइन के लिए खोदे गए गड्ढे में रात के अंधेरे में एक कार गिर गई।
खबरें और भी
मौके पर न बेरिकेड लगे थे और न चेतावनी बोर्ड और लाइट थी। गनीमत रही कि जान बच गई। आठ अप्रैल को नोएडा के सेक्टर 94 में बने गड्ढे में एमिटी यूनिवर्सिटी के छात्र हर्षित की डूबने से मौत हो गई।
नौ जुलाई को इंजीनियर आर्यन सेक्टर 58 में करंट लगने के बाद खले नाले में गिर गया। डूबने से उसकी मौत हो गई। तीन दिन पहले ग्रेटर नोएडा में पांच वर्षीय बच्चे की गड़्ढे में डूबने से मौत हो गई।
गत वर्ष 17 जून को ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौर चौराहे पर अंडरपास के लिए खोदे गए गड्ढे में मोटर साइकिल सवार युवक अंकुर सिंह व युवती कशिश की गिरने से मौत हो गई थी।
सफाईकर्मी भी गंवा चुके हैं अपनी जान
14 जुुलाई को सेक्टर 93 में सीवर मेनहोल में नीचे उतरने के बाद एक सफाईकर्मी की मौत हो गई। रविवार को सेक्टर 150 की एल्डिको लाइव सोसायटी में बिना सुरक्षा उपकरणों के एसटीपी टैंक में सफाई करने उतरे दो सफाई कर्मियों की मौत हो गई।
मुख्यमंत्री के आदेश भी हवा में
अक्टूबर 2024 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया था कि दो माह में सभी गड्ढे भर दिए जाएं। यह अभियान सिर्फ कागज पर चला। जमीनी हकीकत यह है कि गड्ढे अब भी खुले हैं। प्राधिकरण के निगरानी तंत्र भी फेल साबित हुआ।
कार्रवाई क्यों नहीं होती?
हादसे के बाद सिस्टम जागता है, फिर सो जाता है। युवराज मेहता की मौत के बाद नोएडा अथारिटी के सीईओ लोकेश एम को हटाया गया, जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार को बर्खास्त किया गया। बिल्डर अभय कुमार गिरफ्तार हुआ। एसआइटी जांच हुई, लेकिन इससे आगे कुछ नहीं हुआ।
आखिर सुधार क्यों नहीं?
प्राधिकरणों में किसी की जवाबदेही तय नहीं है। निर्माणाधीन साइटों पर लापरवाही के लिए क्षेत्रीय सहायक प्रबंधक,, प्रबंधक, वरिष्ठ प्रबंधक व महाप्रबंधक परियोजना जिम्मेदार होते हैं। यह लोग फील्ड में नहीं जाते।एसी कमरों में बैठकर काम करते हैं।
सारा काम दैनिक वेतन पर काम करने वाले सुपरवाइजरों के हवाले कर दिया जाता है। फील्ड में मानिटरिंग कमजोर है। फील्ड में न जाने की वजह से समन्वय की कमी है।
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