नोएडा के युवराज मेहता मौत मामले में SIT रिपोर्ट ठंडे बस्ते में, HC पहुंची याचिका; सेवानिवृत्त जजों से जांच की मांग
नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले में एसआईटी रिपोर्ट दो महीने से लंबित है, जिसमें कथित तौर पर 12 अधिकारी दोषी पाए गए थे। अब इलाहाबाद हाईकोर ...और पढ़ें
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17 जनवरी को नोएडा के सेक्टर 150 में बेसमेंट के लिए खोदे गए प्लाॅट में भरे पानी में इंजीनियर युवराज मेहता कार समेत गिर गए थे। इस हादसे में उनकी मौत से पहले बचाव कार्य में घोर सरकारी लापरवाही उजागर हुई थी।

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जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में दो महीने से एसआईटी जांच रिपोर्ट शासन के ठंडे बस्ते में है। एक व्यक्ति ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर मामले की जांच सेवानिवृत जजों की समिति से कराने की मांग की है। प्रकरण हाई कोर्ट में पहुंचने के बाद एसआईटी की जांच में युवराज की मौत के लिए जिम्मेदारों के नाम सामने आने की उम्मीद बढ़ गई है।
युवराज की डूब कर मौत
बता दें कि 17 जनवरी को नोएडा के सेक्टर 150 में बेसमेंट के लिए खोदे गए प्लाॅट में भरे पानी में इंजीनियर युवराज मेहता कार समेत गिर गए थे। करीब दो घंटे तक वह कार के ऊपर लेटकर मदद की गुहार लगाते रहे। मौके पर उनके पिता और बचाव के लिए करीब 80 जवान मौजूद रहे।
आरोप है कि पानी ठंडा होने का हवाला देकर कोई भी जवान बचाव को नहीं उतरा। वहां से गुजर रहा डिलीवरी ब्वाॅय हिम्मत दिखाते हुए कमर पर रस्सी बांधकर कार तक पहुंचा, लेकिन तब तक युवराज की डूब कर मौत हो गई थी।
शासन ने कोई कार्रवाई नहीं की
मीडिया में मामला तूल पकड़ने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच के लिए मेरठ मंडलायुक्त की अध्यक्षता में एडीजी जोन मेरठ व डी मुख्य अभियंता पीडब्ल्यूडी की एसआईटी गठित की थी।
एसआईटी ने प्राधिकरण, प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, डिलीवरी ब्वाॅय समेत अन्य के बयान दर्ज किए। करीब डेढ़ महीने बीतने के बाद भी एसआईटी रिपोर्ट पर शासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।
सूत्र बताते हैं कि एसआईटी ने 12 अधिकारियों को दोषी पाया था। युवराज के पिता को शासन से न्याय की उम्मीद थी, लेकिन न तो रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न कार्रवाई की गई। न्याय का इंतजार में पिता देश छोड़कर विदेश में बेटी के पास चले गए।
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पूर्व में भी हुईं कई एसआईटी जांच, नहीं हुई कार्रवाई
ग्रेनो वेस्ट के मास्टरप्लान में दर्ज औद्योगिक भूमि को आवासीय श्रेणी में परिवर्तित किया गया था। इसके लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड और सरकार से अनुमति नहीं ली गई। मामले में गठित एसआईटी ने जांच में 26 अधिकारियों को दोषी पाया, लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं हुई। नोएडा के ट्विन टावर मामले भी एसआईटी जांच में 18 अधिकारी दोषी पाए गए। उसमें भी कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रेटर नोएडा में किसानों की आबादी की बैकलीज मामले में भी एसआईटी गठित की गई थी। किसान कोमन देवी का आरोप लगाया था कि बिसरख गांव में बाहरी लोगों की आबादी को स्थानीय बताकर छोड़ दिया गया।
आश्चर्य की बात है कि एसआईटी जांच में जिन बाहरी लोगों पर जांच के आदेश हुए थे, उनकी ही जमीन बैकलीज कर दी गई। स्थानीय किसान आज तक बैकलीज को भटक रहे हैं। एसआईटी ने किसानों के 234 बैकलीज के प्रकरण को सही माना था और सरकार को भेजा था। डेढ़ साल बाद भी कोई निर्णय नहीं हुआ।
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