अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी : आहत...आक्रोशित लेकिन चुप है आरोपित अविनाश का प्रतापगढ़ स्थित गांव
प्रतापगढ़ का बाबूपुर नरियावां गांव राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपी अविनाश शुक्ला के कारण सुर्खियों में है। गांव वाले इस घटना से आहत और आक्रोशित हैं, ले ...और पढ़ें

प्रतापगढ़ के बाबूपुर नरियावां गांव स्थित राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपित अविनाश शुक्ला का पुराना कच्चा घर। जागरण
HighLights
राम मंदिर चढ़ावा चोरी में अविनाश के पकड़े जाने पर पसरा सन्नाटा
इशारों से व्यक्त किया मन का भाव, बड़ी मछलियों को कब पकड़ेंगे
राज नारायण शुक्ल राजन, जागरण, प्रतापगढ़। खेतों की हरियाली, पेड़-पौधों से समृद्ध बाबूपुर नरियावां गांव की कुछ खास चर्चा पहले नहीं होती थी, लेकिन अब वह सुर्खियों में है। इसकी वजह कोई बखानने लायक उपलब्धि नहीं, बल्कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण है। पूरा गांव इससे बहुत आहत है, गांव के लोगों के मन में आक्रोश भी है। यह आक्रोश अविनाश के साथ अन्य आरोपितों व संदिग्ध बताए जा रहे ट्रस्ट पदाधिकारियों पर भी उतना ही है। वह बड़ी मछलियों के अब तक जाल में न फंसने पर अचरज में भी हैं और इंतजार में भी...।
अविनाश के घर का रास्ता बताने से बचते रहे
दैनिक जागरण टीम शुक्रवार को नरियावां की ओर चली तो जेठवारा व डेरवा के साथ राजापुर में कुछ देर रुकी। जनचर्चा सुनने का प्रयास किया। हर कोई अपने-अपने चश्में से प्रकरण को देख रहा था। गाड़ी जब मुख्य मार्ग से धूल उड़ाते हुए खड़ंजे व कच्चे रास्ते पर बढ़ी तो अगल-बगल के बाशिंदे अपने घर के बाहर आकर झांकने लगे, लेकिन अविनाश के घर का रास्ता तक बताने से वह बचते रहे।
गांव में अजब सा सन्नाटा
फिलहाल टीम गांव में पहुंची तो वहां अजब सा सन्नाटा, लेकिन हर आहट पर चौकन्नी निगाहें दिखीं। चिड़ियों की बोली जरूर कानों में झंकृत हो रही थी। अविनाश का कच्चा घर बंद था। बाहर गाय-बछड़ा, ट्रैक्टर दिखा। उसी के 50 मीटर दूरी पर चमक रहा उसका पक्का नया मकान बंद था। उसमें कुछ लोग थे जरूर, पर उनकी झलक तक नहीं मिली। तीनों लोहे के गेट बंद, हर आहट को महसूस करने की सतर्कता जरूर महसूस की गई।
चढ़ावा चोरी में अविनाश का नाम आने पर गांव आहत
गांव में घूमने पर लोग इस मसले पर बात करने से दूर भागते रहे। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में अविनाश शुक्ला का नाम आने पर पूरा गांव आहत है। सनातनियों के लिए पूज्य भगवान राम का चढ़ावा अविनाश ने कितना चुराया, इसकी तो गहन जांच चल ही है, लेकिन उसके गांव के लोग गांव का नाम बदनाम होने से व्यथित दिखे।
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कई ने इशारे से कहना चाहा...
कई ने इशारे से कहना चाहा कि...पैसे कमाने के लिए ऐसा कार्य करना कतई ठीक नहीं है, लेकिन अन्य को भी बेनकाब होना चाहिए। जब राम मंदिर में भगवान राम विराजे थे तो इस गांव में भी उत्सव हुआ था। सुंदरकांड और रामचरित मानस पाठ हुए थे। दर्जनों लोग प्रभु का दर्शन भी करने गए थे, लेकिन अब वह उन सुखद यादों को संजो नहीं पा रहे हैं। मामला गांव की प्रतिष्ठा का जो आ गया है।
हर कोई इस विषय पर बोलने से बचता रहा
दैनिक जागरण ने गांव के कई घरों के दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन किसी ने इस विषय पर कुछ खास नहीं कहना पसंद किया। एक बुजुर्ग तो पूछने पर बोलना चाहे तो उनकी आंखें सजल हो गईं और वह गमछे से आंसू पाेंछते साइकिल से बाजार की ओर चले गए। एक बुजुर्ग महिला से बात करने का प्रयास करने पर वह लगातार हे भगवान...हे भगवान ही करती रही।