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    भागवत व प्रयाग महात्म्य समेत 3000 पांडुलिपियों को मिलेगा नवजीवन, केंद्र सरकार की ज्ञान भारतम़् संस्था ने ली जिम्मेदारी

    By amrendra singh Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Sat, 31 Jan 2026 05:39 PM (GMT+05:30)

    प्रयागराज के भारती भवन लाइब्रेरी में 3000 पांडुलिपियों को सहेजने की तैयारी है। ज्ञान भारतम् संस्था इन पांडुलिपियों को संरक्षित करेगी, जिनमें भागवत महा ...और पढ़ें

    प्रयागराज के भारती भवन लाइब्रेरी में कपड़े में लपेट कर रखीं पांडुलिपियां। जागरण

    प्रयागराज के भारती भवन लाइब्रेरी में कपड़े में लपेट कर रखीं पांडुलिपियां। जागरण 

    HighLights

    1. प्रयागराज की भारती भवन लाइब्रेरी में पांडुलिपियों को सड़ने से बचाने की तैयारी

    2. केंद्र सरकार की ज्ञान भारतम़् संस्था ने ली है इनको बचाने की अनूठी जिम्मेदारी

    अमरदीप भट्ट, प्रयागराज। स्वतंत्रता आंदोलन और 'हिंदी' की दृष्टि से ऐतिहासिक भारती भवन लाइब्रेरी में सड़ रहीं पांडुलिपियों को नवजीवन मिलेगा। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की संस्था ज्ञान भारतम् के द्वारा इनका संरक्षण होगा। भागवत महात्म्य, तुलसी महात्म्य, एकादशी महात्म्य, सिद्धांत चंद्रिका, पुरुषोत्तम मास, हरितालिका, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा जैसे धार्मिक ग्रंथ, बगलामुखी कवच, वास्तु नवग्रह, प्रयाग महात्म्य, विष्णु सहस्रनाम जैसे दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथों को नष्ट होने से बचाया जा सकेगा। ज्ञान भारतम् के प्रतिनिधि ने 26 जनवरी को लाइब्रेरी पहुंचकर पांडुलिपियों को देखा और इन्हें संरक्षित करने की योजना बताई है।

    लाइब्रेरी में पांडुलिपियों का उचित रखरखाव का अभाव 

    लाइब्रेरी का संचालन भारती भवन ट्रस्ट के द्वारा होता है। इसमें लगभग 3000 पांडुलिपियाें का संग्रह है। वर्तमान में पांडुलिपियां उचित रखरखाव के अभाव में सड़ रही हैं। एक विशाल कक्ष में इन्हें लकड़ी की आलमारियों में रखा गया है, तमाम पांडुलिपियां मेज पर अस्त व्यस्त पड़ी हैं। जो दुर्लभ हैं उन्हें कपड़े मेें लपेट कर रखा गया है इसमें भी दीमक लग रहे हैं। पांडुलिपियों पर धूल जम रही है, यदि संरक्षण न हुआ तो इनके नष्ट होने का खतरा है।  

    ...ताकि नष्ट नहीं होने पाएं धरोहरें

    ज्ञान भारतम् की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर यह कहा गया है कि भारतवर्ष की सनातन ज्ञान परंपरा विश्व की प्राचीनतम एवं सर्वाधिक समृद्ध परंपराओं में एक है। इसके संवाहक हमारे ऋषि मुनि, आचार्य और धर्मगुरु रहे हैं। जिनके द्वारा रचित अमूल्य ग्रंथ आज हस्तलिखित पांडुलिपियों के रूप में मंदिरों, मठों, आश्रमों और परंपरागत पीठों में पीढ़ियों से सुरक्षित चले आ रहे हैं। किंतु यह भी सत्य है कि काल प्रवाह में यह पांडुलिपियां नष्ट होने की अवस्था में पहुंच रही हैं। जीर्ण-शीर्ण होकर काल कवलित होने की स्थिति में हैं। इनका संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां इन बौद्धिक और आध्यात्मिक धरोहरों से हमेशा के लिए वंचित हो जाएंगी। यह केवल संस्थागत दायित्व ही नहीं बल्कि संपूर्ण राष्ट्र का सांस्कृतिक और नैतिक कर्तव्य है।  

    पांडुलिपि संग्रह का निरीक्षण किया

    लाइब्रेरी पहुंचे ज्ञान भारतम् के डाॅ. श्रीधर बारिक ने लाइब्रेरी अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार पांडेय के साथ पांडुलिपि संग्रह का निरीक्षण किया। इनकी दशा और रखरखाव के बारे में जानकारी ली। लाइब्रेरी अध्यक्ष को डा. बारिक ने बताया कि पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए ज्ञान भारतम् ने तैयारी की है। शीघ्र ही इन्हें डिजिटल करने के अलावा वास्तविक रूप में ही संरक्षित करने के कदम उठाए जाएंगे।  

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    पांडुलिपियों को बचाने की नई किरण 

    लाइब्रेरी अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार पांडेय का कहना है कि पांडुलिपियां खराब हो रही हैं, ज्ञान भारतम् संस्था के प्रतिनिधि आए तो उम्मीद की एक नई किरण दिखी है। पांडुलिपियां बहुत हैं और इनमें तमाम दुर्लभ भी। बजट के अभाव में इनका रखरखाव नहीं हो पा रहा है। यदि इन्हें संरक्षित कर दिया जाए तो आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ी सौगात होगी।

    क्या कहते हैं ज्ञान भारतम् के जोनल कोआर्डिनेटर?

    ज्ञान भारतम के जोनल कोआर्डिनेटर डॉ. श्रीधर बारिक ने कहा कि हिंदी साहित्य सम्मेलन, राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय भरद्वाजपुरम (अल्लापुर) के साथ ही भारती भवन लाइब्रेरी में पांडुलिपियों का भी संरक्षण करेंगे। इसकी तैयारी चल रही है। हिंदी साहित्य सम्मेलन में संरक्षण शुरू भी हो चुका है।

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