बेटी पर तेजाब हमले के मामले में पिता को मिली राहत, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रद की सजा, बिजनौर की सत्र अदालत ने सुनाई थी सजा
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेटी पर एसिड अटैक के मामले में पिता रईस अहमद को बरी कर दिया, जिसे बिजनौर की सत्र अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने कहा ...और पढ़ें

बेटी पर एसिड हमले में पिता को मिली उम्रकैद रद कर दी गई है, इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।
HighLights
बिजनौर के नजीबाबाद का मामला
साक्ष्यों के अभाव में सजा से बरी
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपनी ही बेटी पर तेजाब फेंक उसकी हत्या करने के अभियुक्त रईस अहमद उर्फ रईसू को साक्ष्यों के अभाव में अपराध से बरी कर दिया। कोर्ट ने बिजनौर की सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा रद कर दी है। कहा कि अभियोजन अभियुक्त के खिलाफ हत्या करने का ठोस प्रमाण पेश करने में विफल रहा है।
मुख्य आधार मृत्यु कालिक कथन’ सत्य साबित नहीं हुआ
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की खंडपीठ ने पाया कि मामले का मुख्य आधार मृत्यु कालिक कथन’ सत्य साबित नहीं हुआ। नायब तहसीलदार ने जिरह के दौरान स्वीकार किया कि पीड़िता बोलने की स्थिति में नहीं थी और उसका बयान एक अज्ञात महिला रिश्तेदार की मदद से दर्ज किया गया। उस महिला का नाम या विवरण रिकार्ड में नहीं था, जिससे बयान की सत्यता संदिग्ध हो गई।
ट्रायल के दौरान अपने बयानों से मुकर गए
इसके अलावा शिकायतकर्ता, मां समेत प्रमुख गवाह ट्रायल के दौरान अपने बयानों से मुकर गए। अदालत ने यह भी कहा कि धारा 313 सीआरपीसी के तहत अभियुक्त को महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी नहीं दी गई, जो प्रक्रिया का उल्लंघन है। अभियोजन के अनुसार, 2016 में नजीबाबाद में घटना हुई थी और पीड़िता की बाद में एम्स में मौत हो गई थी। कोर्ट ने कहा कि संदेह के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती।