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    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ अवमानना की सुनवाई से न्यायमूर्ति अग्रवाल अलग, इलाहाबाद HC में दायर है याचिका

    By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Thu, 07 May 2026 08:24 PM (IST)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दायर अवमानना याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया ...और पढ़ें

    स्वामी अविमुक्तेश्वराानंद और आशुतोष ब्रह्मचारी।

    स्वामी अविमुक्तेश्वराानंद और आशुतोष ब्रह्मचारी।

    HighLights

    1. न्यायमूर्ति ने कहा- मुख्य न्यायमूर्ति से अनुमति लेकर दूसरी पीठ के समक्ष रखें मामला

    2. अर्जी में आशुतोष ब्रह्मचारी ने अविमुक्तेश्वरानंद व शिष्य के खिलाफ सजा की मांग की है

    विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दायर सिविल अवमानना याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। बुधवार को जब मामला सुनवाई के लिए आया तो न्यायमूर्ति ने कहा कि मुख्य न्यायमूर्ति से अनुमति लेकर प्रकरण नए सिरे से दूसरी पीठ के समक्ष रखा जाए।

    अवमानना में सख्त सजा की मांग की गई है

    अवमानना अर्जी में आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ सख्त सजा की मांग की है। दोनों के खिलाफ नाबालिगों के साथ यौन शोषण के आरोप हैं। याची के अनुसार विपक्षी जानबूझकर हाई कोर्ट की उन शर्तों का उल्लंघन कर रहे हैं, जो पाक्सो केस में अग्रिम जमानत देते समय लगाई गई थीं। अविमुक्तेश्वरानंद व उनके सहयोगी नाबालिग पीड़ितों के गृह जिलों में रैलियां और बैठकें कर रहे हैं, इससे पीड़ितों और उनके परिवारों में डर का माहौल है। पीड़ितों की सुरक्षा और निजता प्रभावित होने की आशंका है।

    याचिका में यह भी तथ्य उल्लिखित है

    याचिका में यह तथ्य भी उल्लेखित है कि कार्यक्रमों के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद बार-बार विभिन्न न्यूज चैनलों, सार्वजनिक मंचों पर भड़काऊ, गुमराह करने वाले और झूठे बयान देते हैं कि उनके खिलाफ केस ‘सरकार के इशारे पर’ दर्ज किए जा रहे हैं। यह न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है तथा अवमानना न्यायालय अधिनियम, 1971 के तहत दंडनीय है।

    याची के अनुसार चलती ट्रेन के अंदर जानलेवा हमला हुआ

    याची के अनुसार उसकी नाक काटने पर 21 लाख रुपये का इनाम सार्वजनिक रूप से घोषित किया गया था। आठ मार्च 2026 को चलती ट्रेन के अंदर जानलेवा हमला हुआ। पाकिस्तानी मोबाइल नंबर से वाट्सएप काल पर जान से मारने की धमकी मिली है। कहा गया है कि अगर उन्होंने केस वापस नहीं लिए तो उन्हें और उनके वकील को बम विस्फोट में मार दिया जाएगा।

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    एक अन्य दीवानी अवमानना याचिका भी

    आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की ही एक अन्य दीवानी अवमानना याचिका पर कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया कि वह इसकी प्रति मुख्य स्थायी अधिवक्ता बिपिन बिहारी पांडे को सौंपें जो सरकार से निर्देश प्राप्त करेंगे। इस मामले में महीने भर बाद सुनवाई होगी। प्रकरण में शामली के अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड अरविंद कुमार एवं तीन अन्य प्रतिवादी हैं।

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