सेवा पुस्तिका में जन्मतिथि को लेकर छेड़छाड़ अमान्य, अलीगढ़ के मामले में इलाहाबाद HC का महत्वपूर्ण आदेश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कर्मचारी की सेवा पुस्तिका में बिना सहमति जन्मतिथि बदलने को अवैध बताया है। कोर्ट ने यतीश सिंह के मामले में मूल जन्मतिथि बहाल करते ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।
HighLights
याची को वर्ष 2027 तक कार्य करने देने का हाई कोर्ट का निर्देश
विभाग ने बिना सूचना दिए उनकी जन्मतिथि में बदलाव कर दिया
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी की सेवा पुस्तिका में उसकी सहमति के बिना की गई छेड़छाड़ पूरी तरह अवैध है। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने यतीश सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि उनकी जन्मतिथि 19 अक्टूबर 1967 ही मानी जाएगी और वे 31 अक्टूबर 2027 को ही सेवानिवृत्त होंगे, तब तक उन्हें काम करने दिया जाय।
यह है पूरा मामला
याची की नियुक्ति वर्ष 1988 में अलीगढ़ स्थित हरदुआगंज थर्मल पावर प्लांट में हुई थी। सेवा में प्रवेश के समय मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उनकी जन्मतिथि 19 अक्टूबर 1967 दर्ज की गई थी, जो सभी आधिकारिक अभिलेखों में वर्षों तक बनी रही। इसी आधार पर उनकी सेवानिवृत्ति 31 अक्टूबर 2027 तय थी।
बिना सूचना जन्मतिथि बदल दी गई
विवाद तब खड़ा हुआ जब लगभग 35 साल बाद विभाग ने बिना सूचना दिए उनकी जन्मतिथि में बदलाव कर दिया। सेवा पुस्तिका में व्हाइटनर लगाकर पुरानी तिथि हटाकर 14 अप्रैल 1966 दर्ज कर दी गई और इसके आधार पर उन्हें 30 अप्रैल 2026 को रिटायर करने का आदेश जारी कर दिया गया। विभाग ने इसके लिए एक पुराने ट्रांसफर सर्टिफिकेट का सहारा लिया।
सेवा में प्रवेश के समय दर्ज जन्मतिथि अंतिम मानी जाएगी
अदालत ने इस कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया। कहा, सेवा में प्रवेश के समय दर्ज जन्मतिथि ही अंतिम मानी जाएगी, विशेषकर जब कर्मचारी उस समय हाईस्कूल पास न हो। बाद में प्राप्त प्रमाणपत्रों के आधार पर इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता।
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कोर्ट का याची को सेवा में बहाल रखने का निर्देश
कोर्ट ने सेवानिवृत्ति संबंधी विभागीय आदेश रद करते हुए याची को सेवा में बहाल रखने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी कहा कि यदि विभाग चाहे तो नियमानुसार जांच पूरी कर सकता है, लेकिन बिना प्रक्रिया की गई कार्रवाई मान्य नहीं होगी।