‘प्रयागराज जंक्शन की मस्जिद के लिए आसपास दान वाली जमीन तलाशें’, इलाहाबाद हाई कोर्ट का अहम सुझाव
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज जंक्शन पर मस्जिद विवाद में व्यावहारिक समाधान सुझाया है। कोर्ट ने याची से 15 मई, 2026 तक आसपास दान में मिली जमीन पर मस् ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने व्यावहारिक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया
अगली सुनवाई तिथि 15 मई को याचीगण को रुख स्पष्ट करना होगा
इलाहाबाद हाई कोर्ट का खंडपीठ ने याची के अधिवक्ता से अनुरोध
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज जंक्शन पर सिटी साइड स्थित मस्जिद को लेकर कानूनी विवाद में उलझने के बजाय व्यावहारिक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया है। न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा तथा सत्यवीर सिन्हा की खंडपीठ ने याची वक्फ मस्जिद रेलवे स्टेशन एवं अन्य की तरफ से पेश अधिवक्ता एसएफ एच नकवी से अनुरोध किया।
अगली सुनवाई तिथि पर रुख स्पष्ट करना होगा
खंडपीठ ने अधिवक्ता से कहा कि उनके मुवक्किल याचिका में अपने दावों और अधिकारों पर बिना कोई प्रतिकूल प्रभाव डाले (विवादित जमीन पर अपना दावा छोड़े बिना) इस बात की पड़ताल करें कि क्या आस-पास ऐसी कोई जमीन उपलब्ध है जिसे मस्जिद को शिफ्ट करने के लिए दान में लिया जा सकता है। अगली सुनवाई तिथि 15 मई, 2026 को याचीगण को इस संबंध में अपना रुख स्पष्ट करना होगा।
जानें पूरा मामला
याचिका में रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर (प्रतिवादी संख्या 5) द्वारा 10 अप्रैल, 2026 को जारी उस नोटिस को चुनौती दी गई है जिसमें रेलवे से जुड़े विकास कार्यों के लिए मस्जिद हटाने को कहा गया है। याचीगण की तरफ से बताया गया कि मस्जिद सौ साल से भी अधिक समय से वहां मौजूद है और याचिका में ऐसे दस्तावेज भी हैं जो दर्शाते हैं कि रेलवे ने पूर्व में मस्जिद के अस्तित्व पर अपनी सहमति दी थी।
दोनों तरफ के अधिवक्ताओं की दलीलें
केंद्र सरकार के लिए अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह और जिला मजिस्ट्रेट की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष गोयल पेश हुए। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने पुराने रुख का हवाला दिया। वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता पुनीत कुमार गुप्ता ने पैरवी की।