Indian Railways SHINE Module : एक क्लिक पर दर्ज होगी महिला रेलकर्मियों की शिकायत, कार्यालयों में नहीं भटकना पड़ेगा
Indian Railways SHINE Module भारतीय रेलवे ने महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए शाइन नामक एक डिजिटल मॉड्यूल लॉन्च किया है। शाइन के माध्यम से महिला रे ...और पढ़ें

Indian Railways SHINE Module रेलवे की शाइन योजना महिला रेलकर्मियों की सुरक्षा और मजबूत करेगी।
HighLights
महिला कर्मचारियों की कार्यस्थल पर सुरक्षा और सम्मान को लेकर महत्वपूर्ण कदम
Indian Railways SHINE Module
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। Indian Railways SHINE Module भारतीय रेलवे ने महिला कर्मचारियों की कार्यस्थल पर सुरक्षा और सम्मान को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आठ मार्च को मनाए जाने वाले 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' के अवसर पर रेलवे बोर्ड एक विशेष डिजिटल माड्यूल 'शाइन' (SHINE) लांच करने जा रहा है। यह पहल शिकायतों के दर्ज करने के तरीके को बदलेगी, रेलवे की कार्य संस्कृति में महिलाओं के विश्वास को भी नया आयाम देगी।
क्या है शाइन'
Indian Railways SHINE Module 'शाइन' यानी 'सेक्सुअल हरेसमेंट इंसिडेंट नोटिफिकेशन फॉर एंपावरमेंट' को रेलवे के ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) पोर्टल के भीतर एक सशक्त टूल के रूप में जोड़ा गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब महिला रेल कर्मचारियों को अपने साथ हुए किसी भी दुर्व्यवहार या यौन उत्पीड़न की शिकायत के लिए किसी कार्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे।
शिकायत दर्ज कराना बड़ी चुनौती थी
Indian Railways SHINE Module अक्सर देखा जाता था कि कार्यस्थल पर अप्रिय घटना होने के बावजूद महिलाएं लोक-लाज या शिकायत की जटिल प्रक्रिया के कारण चुप रह जाती थीं। पहले की व्यवस्था में शिकायत दर्ज कराना एक बड़ी चुनौती थी। पुरानी व्यवस्था के तहत पीड़िता को लिखित आवेदन लेकर संबंधित विभाग के बाबू या अधिकारी के पास जाना पड़ता था। इस प्रक्रिया में गोपनीयता भंग होने का डर बना रहता था और कई बार शिकायतकर्ता को कार्यस्थल पर ही मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता था। पहले अपनी बात सही कमेटी तक पहुंचाने के लिए किसी न किसी मध्यस्थ (बिचौलिए) की मदद लेनी पड़ती थी, जिससे पीड़िता असहज महसूस करती थीं।
डिजिटल बदलाव से होगा फायदा
Indian Railways SHINE Module अब 'शाइन' माड्यूल के आने से अब कोई भी महिला कर्मचारी सीधे 'एम्प्लाई सेल्फ सर्विस' के जरिए आनलाइन अपनी बात दर्ज करा सकेंगी। इसमें किसी तीसरे व्यक्ति के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होगी। शिकायत करने वाली महिला कर्मी की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। यह सिस्टम न केवल शिकायत दर्ज करने का जरिया है, बल्कि यह समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए भी बनाया गया है। अब उच्च अधिकारी खुद पोर्टल के माध्यम से देख सकेंगे कि किस शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई और मामले की जांच में कितनी प्रगति हुई है।
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सबके लिए सुरक्षा का कवच
रेलवे का यह नया सिस्टम केवल स्थाई महिला कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं है। रेलवे बोर्ड ने इस सुरक्षा चक्र को बहुत बड़ा बनाया है। अब रेलवे में कान्ट्रैक्ट पर काम करने वाली महिलाएं, विभिन्न प्रोजेक्ट्स में लगीं महिला कर्मचारी, इंटरनशिप करने वाली छात्राएं और यहां तक कि दफ्तरों में आने वाली बाहरी महिला आगंतुक भी इस पोर्टल के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। यह कदम दर्शाता है कि रेलवे अपने परिसर में आने वाली हर महिला की सुरक्षा के प्रति गंभीर है।
अधिकारियों के कड़े निर्देश और संघ का समर्थन
रेलवे बोर्ड की एडिशनल मेंबर (एचआर) डाॅ. वीजी भूमा ने पांच मार्च को सभी जोनल रेलवे को पत्र जारी कर इस व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि हर महिला कर्मचारी को इस सुविधा की जानकारी दी जाए ताकि वे कार्यस्थल पर खुद को निडर महसूस कर सकें। नार्थ सेंट्रल रेलवे इंप्लाइज संघ के महामंत्री आरपी सिंह ने कहा कि रेलवे बोर्ड का यह फैसला स्वागत योग्य है। उन्होंने बताया कि पहले की जटिल व्यवस्था के कारण कई मामले सामने ही नहीं आ पाते थे, लेकिन अब 'शाइन' माड्यूल के माध्यम से गोपनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। इस नई तकनीक के आने से महिलाओं का मनोबल बढ़ेगा और कार्यस्थल का माहौल और अधिक सुरक्षित एवं पेशेवर बनेगा।
क्रियान्वयन पूरी जवाबदेही संग होगा : सीपीआरओ
भारतीय रेलवे की यह पहल तकनीकी सशक्तिकरण का उदाहरण है। आठ मार्च को 'शाइन' के लांच के साथ ही रेलवे की हजारों महिला कर्मचारियों को एक ऐसा मंच मिल जाएगा, जहां उनकी आवाज़ सुनी जाएगी और उनकी गरिमा की रक्षा की जाएगी। सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि इसका क्रियान्वयन पूरी जवाबदेही के साथ किया जाएगा।