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    समाज कल्याण विभाग के अनुदानित विद्यालयों के शिक्षकों की नियुक्तियां संदेह के घेरे में, प्रयागराज मंडल के जिलों में होगी जांच

    By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Mon, 02 Feb 2026 11:50 PM (IST)

    प्रयागराज मंडल के समाज कल्याण विभाग के अनुदानित विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति में संदेह के चलते जांच के आदेश दिए गए हैं। गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़ और ...और पढ़ें

    प्रयागराज मंडल के समाज कल्याण विभाग के अनुदानित विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की जांच की जाएगी।

    प्रयागराज मंडल के समाज कल्याण विभाग के अनुदानित विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की जांच की जाएगी।

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    1. गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़ और बलिया जनपद में गड़बड़ी के खुलासे के बाद उठाया गया कदम

    2. हर जिले के बीएसए करेंगे जांच, एसीएस समाज कल्याण ने एसीएस बेसिक शिक्षा को लिखा पत्र

    सूर्य प्रकाश तिवारी, प्रयागराज। बलिया, मऊ, आजमगढ़ और गाजीपुर जनपदों में समाज कल्याण विभाग के अनुदानित विद्यालयों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुईं। बगैर मान्यता विद्यालय के संचालन के साथ शिक्षकों की नियुक्तियों में अनियमितता पकड़ी गई। भले ही इन मामलों में जांच चल रही हो, लेकिन अब पूरे प्रदेश में इन विद्यालयों की व्यवस्था संदेह के घेरे में आ गई है।

    प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशांबी व फतेहपुर में जांच 

    शासन अब प्रयागराज मंडल के प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशांबी और फतेहपुर समेत सभी जिलों के अनुदानित विद्यालयों की जांच कराने जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव एल. वेंकटेश्वर लू ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों से इसकी जांच कराने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है।

    गरीब परिवारों के बच्चों को निश्शुल्क मिलती है शिक्षा 

    समाज कल्याण विभाग की ओर से गरीब परिवारों के बच्चों को निश्शुल्क प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए यह विद्यालय खाेले गए थे। निजी प्रबंध तंत्र की देखरेख में चलने वाले इन विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति शासन के अनुमोदन के बाद होती है।

    प्रयागराज मंडल में 32 विद्यालय संचालित

    प्रयागराज मंडल में ही विभाग के 32 विद्यालय संचालित हैं। इनमें सबसे अधिक 26 स्कूल प्रयागराज में हैं। वहीं प्रतापगढ़ में चार तो कौशांबी व फतेहपुर में एक-एक विद्यालय है। इन चारों जनपदों के 32 विद्यालयों में पंजीकृत 2197 छात्र-छात्राएं को पढ़ाने के लिए 69 शिक्षक नियुक्त हैं। यह विद्यालय और उनमें तैनात शिक्षक भी जांच के दायरे में आ गए हैं।

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    शिक्षकों की नियुक्तियों की होगी जांच 

    इन स्कूलों की मान्यता, नियमों व शर्तों के अनुपालन के साथ मौजूदा समय में कार्यरत शिक्षकों की नियुक्तियों की जांच भी होगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी यह जांच करेंगे। उपनिदेशक समाज कल्याण सुधीर कुमार ने बताया कि कई जनपदों में विभाग के अनुदानित विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति समेत अन्य गड़बड़ी सामने आई थी। इसी के बाद अब सभी जिलों के अनुदानित विद्यालयों की जांच कराई जा रही है। इसका आदेश आ गया है।

    ऐसे ही नहीं गहराई अनियमितताओं की आशंका

    समाज कल्याण विभाग के अनुदानित विद्यालयों में अनियमितताओं की शिकायत लगातार हो रही थी। इसी बीच वर्ष 2019 में मुंगराबादशाहपुर की विधायक विधायक सुषमा पटेल ने यह मुद्दा विधानसभा में उठा दिया। इस पर आजमगढ़, मऊ, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, लखनऊ में विभाग के विद्यालयों की जांच हुई। जांच के दौरान गाजीपुर में 13, आजमगढ़ में 42 और मऊ में 40 शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी मिली।

    कुछ नियुक्तियां का शासन से अनुमोदन नहीं  

    कुछ नियुक्तियां शासन से अनुमोदन लिए बगैर हुईं थीं तो कुछ के नियुक्ति पत्र ही बेसिक शिक्षा से जारी नहीं हुए थे। इसके बाद वर्ष 2024 में बलिया में ऐसी गड़बड़ी मिली। यहां महामना मालवीय अनुसूचित जाति प्राथमिक पाठशाला जकरिया, रसड़ा के शिक्षकों ने वेतन व अन्य देयकों को लेकर उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की। इसमें दावा किया कि शिक्षा अधिनियम-1772 के तहत उनके विद्यालय को मान्यता मिली है। जबकि, शिक्षा अधिनियम ही 1972 में आया था। गहराई में जाकर मामले की जांच हुई तो पता चला कि न विद्यालय मान्यता प्राप्त है और न शिक्षकों की नियुक्ति का कोई अनुमोदन।

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