प्रयागराज के HRI परिसर में दिखा तेंदुआ, सीसीटीवी में दिखी चहलकदमी, गंगापार के झूंसी के आसपास इलाकों के लोगों की उड़ी नींद
प्रयागराज के एचआरआई परिसर में एक बार फिर तेंदुआ दिखने से दहशत फैल गई है, जिसकी चहलकदमी सीसीटीवी में कैद हुई है। वन विभाग ने जांच की लेकिन पगचिह्न नहीं ...और पढ़ें

झूंसी के एचआरआइ परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद तेंदुआ। सौ. वीडियो गैव
HighLights
चार माह पूर्व वन विभाग की टीम ने पकड़ा था एक तेंदुआ, एक ही सड़क हादसे में गई थी जान
वन टीम ने एचआरआइ में खंगाला पर नहीं मिले तेंदुआ के पगचिह्न, अफसर बोले- जंगली बिल्ला
संसू, झूंसी (प्रयागराज)। तेंदुआ की दहशत से जनपद के लोगों को छुटकारा नहीं मिल रहा है। चार माह पूर्व एक तेंदुआ पकड़ा गया था। पिछले माह एक तेंदुआ की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। अब छतनाग के हरिश्चंद्र अनुसंधान संस्थान (एचआरआइ) में यह तेंदुआ नजर आया है। बुधवार रात संस्थान परिसर में इसकी चहलकदमी सीसीटीवी में कैद हुई। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंच कर छानबीन की। फिलहाल, इलाके में खौफ का माहौल है।
आठ जनवरी को छिवैया गांव में तेंदुआ पकड़ा गया था
गंगा की तराई वाले इलाके में स्थित एचआरआइ में पिछले वर्ष से ही तेंदुआ खतरा बना हुआ है। सबसे पहले अक्टूबर में यहां तेंदुआ दिखा था। कई दिनों तक वह परिसर में आता-जाता रहा। वन विभाग ने यहां पांच नाइट विजन कैमरे और चार पिंजरे लगाए थे। फिर भी वह हाथ नहीं आया था। जबकि बीच-बीच में कई बार इसे एचआरआइ या इसके आसपास के इलाकों में स्थानीय लोगों ने देखा। आठ जनवरी को छिवैया गांव में तेंदुआ पकड़ा गया था। इससे लोगों ने सुकून की सांस ली थी। लगा था कि अब शायद तेंदुआ खौफ बनकर नहीं मंडराएगा।
कछार में सामान्य हो रही जिंदगी में फिर दहशत
सूरज ढलने के बाद घरों से न निकलने वाले कछार के लोग पहले की तरह सामान्य जीवन जीने लगे थे, लेकिन बुधवार की रात एचआरआइ में फिर तेंदुआ खौफ बनकर आ गया। तेंदुआ परिसर में एक जगह से दूसरी तरफ जाता दिख रहा है। वहां पर लगे सीसीटीवी कैमरे में उसकी तस्वीर भी कैद हुई है। इसके बाद से परिसर में रहने वाले तमाम वैज्ञानिक, शोधार्थी व अन्य कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ गईं हैं।
लुका-छिपी का खेल शुरू
तेंदुआ और वन विभाग के बीच एक बार फिर लुका-छिपी का खेल शुरू हो गया है। एक बार फिर से तेंदुआ अपनी मौजूदगी के प्रमाण दे रहा और महकमा तरह-तरह के तर्क देकर पीछा छुड़ा रहा है। झूंसी के छतनाग स्थित एचआरआइ में मंगलवार की रात तेंदुआ की झलक दिखने के बाद कुछ ऐसा ही हो रहा है। वन विभाग के अधिकारी उसे जंगली बिल्ला बता रहे हैं।
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एचआरआइ के लोग अंधेरे में बाहर निकलने से कतरा रहे
एचआरआइ में मंगलवार की रात तेंदुआ दिखने के बाद से वहां के शोधार्थी और कर्मचारी ही नहीं इलाके की बस्ती में लोग भी दहशत में हैं। एचआरआइ में रहने वाले शोधार्थी सूरज ढलने के बाद कमरों से बाहर निकलने में कतरा रहे हैं। देर रात तक बाहर रहने वालों ने भी शाम से पहले लौटना शुरू कर दिया।
आसपास गांवों के ग्रामीणों में दहशत
आस-पास के गांव छतनाग, नींबी भदकार, हवेलिया, झूंसी कोहना व उस्तापुर महमूदाबाद में पूरी रात लोग चैन से सो नहीं सके। हाल यह था कि कुत्तों के भौंकने भर से लोग कांप गए। खिड़कियों और झरोखों से झांक कर घर के बाहर की गतिविधियों की टोह लिया। सबसे ज्यादा चिंतित वह रहे जिनके मवेशी घरों के बाहर बंधे थे।
वन विभाग ने तेंदुआ के पग चिह्न खोजने का किया प्रयास
बुधवार रात वन विभाग की टीम एचआरआइ पहुंची थी, लेकिन अंधेरे की वजह से पड़ताल नहीं हो पाई थी। ऐसे में गुरुवार की सुबह फूलपुर रेंज के डिप्टी रेंजर सत्येंद्र चौधरी फिर मौके पर पहुंचे। सूरज की रोशनी में परिसर का चप्पा-चप्पा छाना। तेंदुआ के पग चिह्न खोजने का प्रयास किया गया। सीसीटीवी फुटेज में जिस जगह से उसको आते जाते देखा गया था, उस स्थान पर बारीकी से जांच की गई, लेकिन टीम के हाथ कुछ नहीं लगा।
डिप्टी रेंजर बोले- तेंदुआ नहीं, जंगली बिल्ला हो सकता है
डिप्टी रेंजर का कहना है कि पूरे परिसर में कहीं तेंदुआ के पगचिह्न नहीं मिले है। सीसीटीवी फुटेज देखने लगता है कि नजर आ रहा जानवर तेंदुआ नहीं, बल्कि बड़े आकार का जंगली बिल्ला हो सकता है। बड़े आकार के कारण वह तेंदुआ जैसा दिखा रहा है।