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    Mahashivratri 2026 : महाशिवरात्रि का पूजन-जागरण और उपवास से पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति व मोक्ष प्राप्ति संभव, ऐसे करें पूजन

    By Sharad Dwivedi Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Thu, 05 Feb 2026 05:20 PM (IST)

    Mahashivratri 2026 महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन फाल्गुन कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि है और भक्त भगवान शिव की स्तुति करेंगे। माघ ...और पढ़ें

    Mahashivratri 2026 प्रयागराज के ज्योतिर्षाचार्यों ने महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त और महत्व बताया।

    Mahashivratri 2026 प्रयागराज के ज्योतिर्षाचार्यों ने महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त और महत्व बताया।

    HighLights

    1. महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा

    2. अंतिम स्नान पर्व के साथ माघ मेले का होगा समापन

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। Mahashivratri 2026 फाल्गुन कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। सनातन धर्मावलंबी मनोवांछित फल की प्राप्त के लिए महादेव भगवान शिव की स्तुति करेंगे। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि माघ मेला का अंतिम स्नान पर्व है। इसके साथ मेला क्षेत्र पूरी तरह से उजड़ जाएगा। संत और श्रद्धालु अगले वर्ष पुन: आने का संकल्प लेकर तीर्थराज प्रयाग से रवाना होंगे। महाशिवरात्रि में रात में पूजा का विधान है। रात में श्रवण नक्षत्र रहेगा। वहीं चतुर्ग्रहीय योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है।

    14 की दोपहर 3.11 बजे लगेगी त्रयोदशी तिथि : आचार्य 

    Mahashivratri 2026 ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार त्रयोदशी तिथि 14 फरवरी की दोपहर 3.11 बजे लग जाएगी। जो 15 फरवरी की शाम 4.23 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि लगेगी। महाशिवरात्रि में चतुर्दशी तिथि रहना आवश्यक है। वहीं, 15 फरवरी की शात 7.28 बजे तक उत्तराषाढ़ नक्षत्र रहेगा। शाम 7.29 बजे से श्रवण नक्षत्र लग जाएगी। कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र व राहु का संचरण होने से चतुर्ग्रहीय योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। इसमें स्नान-दान से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी।

    आचार्य विद्याकांत ने बताई पर्व की विशेषता

    Mahashivratri 2026 पाराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार यौगिक परंपरा में शिव देवता नहीं, आदिगुरु अर्थात प्रथम गुरु माने गए हैं। शिव से ज्ञान उपजा। ध्यान की अनेक सहस्राब्दियों के बाद एक दिन भगवान शिव कैलाश पर्वत पर पूरी तरह से स्थिर हो गए। तब उनकी सारी गतिविधियां शांत हो गईं और वे पूरी तरह स्थिर हो गए। माना जाता है कि वो दिन महाशिवरात्रि का था।

    मोक्ष प्राप्ति की रात्रि है महाशिवरात्रि : श्रीधरानंद

    द्वारका शारदा पीठ के प्रतिनिधि व श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर के महंत श्रीधरानंद ब्रह्मचारी के अनुसार परमआत्मा का नाम शिव है। जो 'सदा कल्याणकारी' हैं। शिवरात्रि अर्थात शिवतत्व वाली रात। शिवरात्रि भगवान शिव की अतिप्रिय रात्रि को है। व्रत रखकर रातभर जागरण और रुद्राभिषेक करने से दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। स्कंद पुराण में कहा गया है कि महाशिवरात्रि का पूजन, जागरण और उपवास करने वाले का पुनर्जन्म नहीं होता अर्थात मोक्ष की प्राप्ति होती है। शिव पुराण में वर्णित है कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव पहली बार प्रकट हुए थे।

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