उत्तर मध्य रेलवे असमंजस में, प्रयागराज में जी-प्लस फाइव बिल्डिंग खाली करे तो कर्मी नाराज न करे तो ठेकेदार; क्या है विवाद?
प्रयागराज जंक्शन के सिटी साइड पर स्थित जी-प्लस फाइव बिल्डिंग उत्तर मध्य रेलवे के लिए परेशानी का कारण बन गई है। रेलवे इस इमारत को निजी हाथों में सौंपने ...और पढ़ें

प्रयागराज जंक्शन के सिटी साइड में जी-प्लस फाइव बिल्डिंग को लेकर असंतुष्ट रेलवे कर्मचारी। सौजन्य : रेलवे यूनियन
HighLights
प्रयागराज जंक्शन के सिटी साइड पर बनी 'जी-प्लस फाइव' बिल्डिंग एनसीआर के लिए जी का जंजाल बी
इस पांच मंजिला इमारत को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी में है उत्तर मध्य रेलवे, यही विवाद की जड़
रेलवे प्रशासन ने बिल्डिंग के कार्यालयों में तालाबंदी की तो कोशिश की, रेलवे यूनियनों ने मोर्चा खोल दिया
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। प्रयागराज जंक्शन के सिटी साइड (लीडर रोड) पर खड़ी आलीशान 'जी-प्लस फाइव' बिल्डिंग इस समय उत्तर मध्य रेलवे के लिए जी का जंजाल बन गई है। रेल प्रशासन एक तरफ विकास की पटरियों पर दौड़ना चाहता है, तो दूसरी तरफ अपनों के ही विरोध का ब्रेक उसे ठहरने पर मजबूर कर रहा है। विवाद की जड़ इस पांच मंजिला इमारत को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी और यहां कार्यरत कर्मचारियों के भविष्य को लेकर बरती गई बेरुखी है।
विकास बनाम विवाद का मोर्चा
रेलवे ने इस 'मल्टी फंक्शनल कांप्लेक्स' को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर इसे 15 वर्ष के ठेके पर देने के लिए ई-नीलामी की तैयारी कर रही है। 14 अप्रैल को होने वाली इस नीलामी के लिए कैटलाग भी जारी हो चुका है। हालांकि पेंच यह है कि इस इमारत में वर्तमान में यातायात लेखा कार्यालय और गति शक्ति यूनिट के दफ्तर संचालित हो रहे हैं।
कर्मचारियों के बैठने की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं
रेलवे प्रशासन ने नीलामी की प्रक्रिया तो शुरू कर दी लेकिन यहां दिन-रात काम करने वाले कर्मचारियों के बैठने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। जैसे ही प्रशासन ने कार्यालयों में तालाबंदी की कोशिश की, रेलवे यूनियनों ने मोर्चा खोल दिया। अब स्थिति यह है कि कदम आगे बढ़ाएं तो कर्मचारी और यूनियन नाराज और कदम पीछे खींचे तो ठेकेदार और राजस्व को नुकसान।
क्या है इस 'ड्रीम प्रोजेक्ट' में खास?
यह बिल्डिंग महज एक ढांचा नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए एक लग्जरी हब है। इसमें प्रीमियम स्टे के लिए 68 कमरे और आठ बड़े हाल बनाए गए हैं।
होटल और डोर्मिटोरी : टाप फ्लोर पर आलीशान सुइट्स और अन्य तलों पर बजट होटल की सुविधा।
बिजनेस सेंटर : व्यापारियों के लिए को-वर्किंग स्पेस और कान्फ्रेंस रूम।
रिटेल थेरेपी : शॉपिंग सेंटर, दवा की दुकानें और हस्तशिल्प केंद्र।
स्मार्ट सुविधाएं : स्टिल्ट फ्लोर पर स्मार्ट पार्किंग और ईवी चार्जिंग प्वाइंट्स।
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समाधान की तलाश में देर रात तक मंथन
ठेका पाने वाली कंपनी को खाली बिल्डिंग सौंपना रेलवे की मजबूरी है, ताकि वह अपने अनुसार बदलाव कर सके। इसी समस्या को सुलझाने के लिए गुरुवार देर रात तक आला अधिकारियों की बैठक चली। सुझाव यह आया कि सभी कार्यालयों को मुख्यालय शिफ्ट कर दिया जाए। हालांकि मुख्यालय में भी स्थान की कमी है, जो प्रशासन के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरी है।
बीच का रास्ता निकालने की तैयारी
फिलहाल रेलवे प्रशासन ऐसा रास्ता तलाश रहा है, जिससे कर्मचारी संतुष्ट रहें और नीलामी की प्रक्रिया भी बेदाग पूरी हो जाए। अगर समय रहते समाधान नहीं निकला तो 14 अप्रैल की नीलामी पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं।
कर्मचारी संघ के महामंत्री ने जताया विरोध
उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ के महामंत्री रूपम पांडेय ने कहा कि "प्रशासन की यह जबरदस्ती तानाशाही है। न कोई पूर्व सूचना दी गई, न ही कर्मचारियों के लिए दूसरे दफ्तर का प्रबंध किया गया। इस तरह का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"