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    छह हजार किसान खेतों में उगा रहे सेहत का खजाना, डीएपी और यूरिया आदि रासायनिक खादों व कीटनाशकों से बनाई दूरी

    By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Fri, 08 May 2026 05:21 PM (IST)

    प्रयागराज मंडल में 6375 किसान 2550 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, जिससे खेती की लागत कम हो रही है और धरती को बंजर होने से बचाया जा रहा है। रा ...और पढ़ें

    प्रयागराज में सोरांव क्षेत्र के उदयचंद्रपुर में प्राकृतिक खेती से तैयार परवल की फसल। सौ. किसान

    प्रयागराज में सोरांव क्षेत्र के उदयचंद्रपुर में प्राकृतिक खेती से तैयार परवल की फसल। सौ. किसान

    HighLights

    1.  प्रयागराज मंडल के चारों जनपदों में 2550 हेक्टेयर में हो रही प्राकृतिक खेती

    2. 6375 किसान रासायनिक खाद, कीटनाशकों से बना रहे दूरी।

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। रासायनिक खाद और कीटनाशकों से अब किसानों ने दूरियां बनानी शुरू कर दी है। प्रयागराज मंडल में 6375 किसान अपने खेतों में सेहत का खजाना उगा रहे हैं। इन अन्नदाताओं ने प्राकृतिक खेती को अपनाकर खेती की लागत घटा ली है। साथ ही धरती को बंजर बनने से भी बचा रहे हैं।

    रंग ला रही नेचुरल फार्मिंग

    डीएपी, यूरिया और कीटनाशकों के अधाधुंध प्रयोग वाली उपज सेहत के लिए हानिकारक होती है। इसलिए, सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती की तरफ मोड़ने की मुहिम चला रही है। कृषि विभाग का नेशनल मिशन ऑफ नेचुरल फार्मिंग भी इसी का हिस्सा है, जो अब रंग ला रहा है। मंडल के चारों जनपदों में करीब 2550 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती शुरू हो गई है।

    इन जनपदों में कीटनाशकों से बनाई दूरी 

    प्रयागराज के करछना, सोरांव, श्रृंगवेरपुर, जसरा सहित अन्य ब्लाकों में करीब 1500 किसानों ने रासायनिक खाद व कीटनाशकों से किनारा करना शुरू कर दिया है। प्रतापगढ़ में 2750 किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं। इसी तरह फतेहपुर में 1125 और कौशांबी में एक हजार किसानों ने खेती में डीएपी, यूरिया सहित अन्य रासायनिक खादों व कीटनाशकों से दूरी बना ली है। इससे एक तरफ जहां खेती की लागत प्रति बीघे डेढ़ से दो हजार रुपये घट गई है। वहीं स्वास्थ्य के लिए लाभदायक उपज की मांग भी खूब हो रही है। इसे लेकर किसान उत्साहित हैं। 

    जनपदवार प्राकृतिक खेती का क्षेत्रफल

    प्रयागराज - 600 हेक्टेयर

    फतेहपुर - 450 हेक्टेयर

    प्रतापगढ़ - 1100 हेक्टेयर

    कौशांबी - 400 हेक्टेयर

    किसानों की जुबानी

    अभी तो सिर्फ दो बीघे में गेहूं व धान की प्राकृतिक खेती कर रहा हूं। प्रति बीघे डेढ़ से दो हजार रुपये की बचत हो रही है। इसका क्षेत्रफल बढ़ाने का इरादा है।
    - हौसला प्रसाद, लिगडहिया

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    परवल, धनिया, टमाटर, उर्द, मूंग आदि की प्राकृतिक खेती कर रहा हूं। रासायनिक की अपेक्षा यह ज्यादा फायदेमंद है। इस उपज की मांग भी खूब रहती है।
    - सतीश कुमार मौर्य, उदयचंद्रपुर

    सरकार प्राकृतिक और जैविक खेती पर जोर दे रही है। किसान इसमें रुचि भी दिखा रहे हैं। अधिक से अधिक किसानों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
    - संतोष कुमार राय, संयुक्त कृषि निदेशक।

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