प्रयागराज : गंगा में बाढ़ का खतरा अभी दूर फिर भी सता रहा डर, नदी तटीय इलाकों के बाशिंदे घर छोड़ने की करने लगे तैयारी
प्रयागराज में गंगा का जलस्तर अभी दूर होने के बावजूद, नदी तटीय इलाकों के बाशिंदे बाढ़ के डर से घर छोड़ने की तैयारी में जुट गए हैं। गृहस्थी ऊपरी मंजिलों ...और पढ़ें

प्रयागराज में द्रोपदी घाट स्थित कछार बस्ती में घर के ऊपरी तल पर पहुंचाई गई गृहस्थी दिखाते रमेश। जागरण
HighLights
द्रोपदी घाट से बेली कछार तक लोग समेट रहे गृहस्थी
कई स्थानों पर घर के ऊपरी मंजिल पर पहुंचाई रसोई
अर्धनिर्मित घरों में सांप, बिच्छू, विषखोपड़ा आदि निकल रहे
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। गंगा का बहाव अभी तटीय इलाकों की बस्तियों से काफी दूर है। पानी बढ़ता रहा तो भी बाढ़ आने में कई दिन लग सकते हैं। फिर भी यहां रहने वाले लोगों के मन में डर समाया है, क्योंकि उन्हें हर साल अपने घर छोड़ने पड़ते हैं। कछारी बस्तियों के कई घरों में रसोई घरों के ऊपरी तल पर पहुंच गई है। लोगों ने बक्से और बिस्तर समेटना शुरू कर दिया है कि जाने कब बाढ़ की मुसीबत आ जाए। द्रोपदी घाट से लेकर राजापुर कछार और बेली गांव तक रातें असमंजस में बीत रही हैं। घरों में सांप, बिच्छू व अन्य जहरीले जंतु घुस रहे हैं इनका खतरा अलग से है।
पिछले वर्ष बाढ़ ने सामान समेटने का मौका नहीं दिया था
द्रोपदी घाट पर रमेश हलवाई ने घर छोड़ने की तैयारी पहले से कर रखी है। पिछले साल रात में अचानक बाढ़ आ गई थी तो जितनी गृहस्थी निकाल पाए वही लेकर भागना पड़ा। एलईडी, फ्रिज पानी में डूब गया था। मंगलवार को अपने घर ले गए। दिखाया कि बक्से, रसोई, आलमारी, एलईडी को ऊपरी तल पर पहुंचा दिया है। अन्य गृहस्थी समेटी जा रही है ताकि बाढ़ की आहट होते ही उसे सुरक्षित कर सकें।
रिश्तेदार के घर पहुंचाया गृहस्थी का सामान
कुछ ही दूर चंदन का घर है, ज्यादातर गृहस्थी उन्होंने अपने एक रिश्तेदार के यहां पहुंचा दी है। रसोई, बर्तन, बिस्तर और ड्रम आदि ही रखे हैं। चंदन ने बताया कि बाढ़ आने में कई दिन हैं, पानी अभी पेटा में है लेकिन आशंका भी जताई कि जलस्तर कभी-कभी अचानक बढ़ जाता है फिर भागना ही पड़ता है। इसलिए तैयारी पहले से कर ली है।
गोपालजी के मंदिर में बसाते हैं डेरा
उर्मिला ने कहा कि घर में हर साल पानी भर जाता है, गृहस्थी डूब जाती है। काफी नुकसान हो जाता है। इस बार पहले से तैयारी कर ली है। बताया कि बेटे ने ज्यादातर गृहस्थी समेट दी है, उसे एक कमरे में रखा गया है। जैसे ही बाढ़ की आहट होगी उसे ऊपर वाले कमरे में पहुंचाकर गोपाल जी के मंदिर में डेरा जमा लेंगे।
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अभी से घुस रहे जहरीले जंतु
राजापुर स्थित गंगानगर कछार के तटवर्ती इलाकों में जहरीले जंतुओं का खतरा बढ़ गया है। जहां बस्तियां अभी बस रही हैं, कुछ अर्धनिर्मित घर हैं वहां सांप, बिच्छू, विषखोपड़ा आदि निकल रहे हैं। रात में बिजली चली गई तो खतरा और बढ़ जाता है। लोगों की पीड़ा यह भी है कि शहर में जमीन बहुत महंगी है, कछार में ही बसना पड़ा। इसलिए हर साल बाढ़ की परेशानी भी झेल रहे हैं।