प्रधानों के प्रशासक बनते ही प्रयागराज के 1540 ग्राम पंचायतों में भुगतान ठप, विकास कार्यों पर लगी ब्रेक
प्रयागराज की 1540 ग्राम पंचायतों के प्रधानों के डोंगल कार्यकाल पूरा होने के बाद निष्क्रिय हो गए हैं, जिससे विकास कार्यों के भुगतान रुक गए हैं। प्रशासक ...और पढ़ें

कार्यकाल पूरा होने के बाद डोंगल निष्क्रिय होने से प्रधान परेशान हैं।
HighLights
कार्यकाल पूरा होने के बाद डोंगल हुए निष्क्रिय, प्रधानों में मची खलबली
पंचायती राज विभाग के अधिकारियों को ऊपर से निर्देश का इंतजार
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। पांच वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के बाद 1540 ग्राम पंचायतों के प्रधानों के डोंगल अचानक निष्क्रिय हो गए हैं। इसी के साथ ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों के भुगतान पर भी ब्रेक लग गई है। पहली बार प्रशासक बनाए गए प्रधानों (अब निवर्तमान) में इसे लेकर खलबली हुई है।
प्रधानों का कार्यकाल 25 मई की रात 12 बजे समाप्त
गंगापार व यमुनापार की 1540 ग्राम पंचायतों में प्रधानों का कार्यकाल 25 मई की रात 12 बजे समाप्त हो गया है। इससे पहले जब चुनाव से पहले प्रधानोें का कार्यकाल समाप्त होता था, तो एडीओ पंचायत प्रशासक बनाए जाते थे। इस बार प्रधानों की ओर से प्रशासक की जिम्मेदार उन्हें देने की मांग की जा रही थी। इस पर शासन ने उन्हें प्रशासक बना भी दिया है। 25 मई को इसका आदेश जारी हुआ था।
प्रधानों की उम्मीद पर फिरा पानी
प्रधानों को लगा था कि प्रशासक बनने के बाद वह पहले की तरह काम करते रहेंगे। ग्राम पंचायत के खाते से भुगतान बेरोकटोक होते रहेंगे। इनकी उम्मीदों पर तब पानी फिर गया, जब अचानक प्रधानों के डोंगल निष्क्रिय हो गए। कई प्रशासकों ने बुधवार को भुगतान करने का प्रयास भी किया। जब पेमेंट नहीं हुए तो धड़कनें बढ़ गईं।
जिला मुख्यालय पहुंचे प्रधान
प्रशासक समझ नहीं पा रहे हैं कि कार्यकाल पूर्ण होने के बाद भी ग्राम पंचायतों के संचालन के अधिकार मिल गए हैं तो डोंगल क्यों निरस्त किए गए। कई प्रधान तो इसी उलझन को सुलझाने के लिए जिला मुख्यालय तक पहुंच गए, लेकिन यहां उन्हें उचित जवाब नहीं मिला।
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सभी प्रधानों के डोंगल निष्क्रिय हुए
अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष सुरेश त्रिपाठी ने बताया कि सभी प्रधानों के डोंगल निष्क्रिय हो गए हैं। इस संबंध में अधिकारियों से वार्ताा की जाएगी। वहीं डीपीआरओ रविशंकर द्विवेदी ने बताया कि प्रधानों के डोंगल निष्क्रिय नहीं किए गए हैं। हो सकता है कि कार्यकाल पूरा होने पर अपने आप निष्क्रिय हो गए हों। उच्चाधिकारियों के दिशा-निर्देश लेकर इस प्रकरण में उचित कदम उठाए जाएंगे।