संगम नगरी में तालाबों-झीलों के अस्तित्व पर संकट के बादल, अब इनके संरक्षण की पहल, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
प्रयागराज में तालाबों और झीलों पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। अतिक्रमण और पानी के रास्तों के बंद होने से इनकी स्थिति खराब हो गई है। अब इनके संरक्षण ...और पढ़ें

प्रयागराज जिले में गंगापार के फूलपुर रेंज में स्थित चिखड़ी झील। जागरण
HighLights
दो झीलों का गजट के लिए और तीन का नमामि गंगे योजना के तहत हुआ चयन
प्रदेश की स्टेट वेटलैंड अथारिटी जनपदों में झीलों को अधिसूचित करने जा रही है
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। कहीं अतिक्रमण है तो कहीं पानी आने के रास्ते बंद हो गए। इन्हीं स्थितियों ने तालाबों व झीलों के अस्तित्व को संकट में डाल दिया है। अब झीलों के संरक्षण की पहल हुई है। जिले में पांच बड़े तालाबों व झीलों को चिह्नित किया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इनकी स्थिति में सुधार होगा। यही नहीं यहां पर्यटन की राह भी खुलेगी।
इनकी गिनती बड़े तालाबों व झीलों में होती है
फूलपुर रेंज के चिखड़ी, अंदावा, प्रयाग रेंज के नुमैया डाही, हंडिया रेंज के उपरहदा और सोरांव रेंज के बड़ा तालाब की गिनती जिले के बड़े तालाबों व झीलों में होती है। इनमें से उपरहदा तालाब का क्षेत्रफल 148 हेक्टेयर है। नुमैया डाही 47 हेक्टेयर, बड़ा तालाब आठ हेक्टेयर, चिखड़ी 33 हेक्टेयर और अंदावा स्थित तालाब करीब दो हेक्टेयर में है।
अंदावा व चिखड़ी झील का प्रस्ताव शासन को भेजा
प्रदेश की स्टेट वेटलैंड अथारिटी जनपदों में झीलों को अधिसूचित करने जा रही है। इसमें अंदावा व चिखड़ी झील भी शामिल है। इनके प्रस्ताव शासन को भेज दिए गए हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत भी तालाबों व झीलों को संवारने की कवायद चल रही है। नुमैया डाही, उपरहदा और बड़ा तालाब इसमें लिया गया है।
क्या कहते हैं डीएफओ?
इस संबंध में प्रयागराज के डीएफओ अरविंद कुमार ने बताया कि उपरहदा तालाब से संबंधित प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। अन्य दो तालाबों के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही इसका भी प्रस्ताव भेज दिया जाएगा।
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जैव विविधता काे संरक्षित करने की है कवायद
झीलों के सहारे सरकार जैव विविधता को सहेजने का प्रयास कर रही है। जिले के जिन बड़े तालाबों व झीलों का चयन हुआ है, वह भी जैव विविधता की झलक दिखती है। यह झीलें जब पानी से लबालब रहती है तो पक्षियों को आकर्षित करते हैं। तरह-तरह की मझलियों के साथ अन्य जलीय जीवों काे सहारा देते हैं। जिसने एक भी यहां की सुंदरता को एक बार करीब से देख लिया फिर वह मोहित हो जाता है। माना जा रहा है कि आगे चलकर यह झीलें पर्यटन को भी बढ़ावा देंगी।