ई-आफिस व्यवस्था के नाम पर निदेशालय कर्मचारियों का वेतन रोके जाने से आक्रोश, प्रयागराज में आंदोलन की चेतावनी
प्रयागराज शिक्षा निदेशालय के कर्मचारियों का वेतन ई-ऑफिस व्यवस्था के कारण रोका गया, जिससे उनमें आक्रोश है। शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ ने ...और पढ़ें

उत्तर प्रदेश शिक्षा निदेशालय प्रयागराज। फाइल फोटो
HighLights
कंप्यूटर की कमी, समुचित इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी से ई-आफिस व्यवस्था में बाधा
शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ ने अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक को भेजा ज्ञापन
राज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। शिक्षा निदेशालय उत्तर प्रदेश, प्रयागराज में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों का जनवरी 2026 का वेतन अभी तक निर्गत नहीं होने से उनमें असंतोष है। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन न मिलने के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
विभाग क्या कहता है?
विभागीय स्तर पर बताया गया है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के जनवरी 2026 के आदेश के क्रम में ई-ऑफिस प्रणाली पर कार्य न होने के कारण वेतन आहरित नहीं किया गया। इस संबंध में शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ के अध्यक्ष घनश्याम यादव एवं मंत्री सुरेन्द्र कुमार सिंह ने अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक सुरेन्द्र कुमार तिवारी को ज्ञापन भेजकर वेतन आहरित कराए जाने की मांग की है।
संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश
बताया है कि ई-आफिस प्रणाली लागू करने के लिए कुछ अनिवार्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें एनआइसी या सरकारी ईमेल आइडी, डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी), पर्याप्त क्षमता वाला कंप्यूटर या लैपटाप, स्कैनर, हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन, कर्मचारी मास्टर डिटेल्स तथा वीपीएन की व्यवस्था शामिल है।
वेतन रोका जाना अन्यायपूर्ण बताया
आरोप है कि शासन के निर्देशों के बावजूद निदेशालय स्तर पर अब तक लगभग 70 प्रतिशत अधिकारियों व कर्मचारियों को न तो कंप्यूटर/लैपटाप उपलब्ध कराए गए हैं और न ही समुचित इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित की गई है। ऐसे में ई-ऑफिस प्रणाली के आधार पर वेतन रोका जाना अन्यायपूर्ण है।
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कर्मचारियों ने दी आंदोलन की चेतावनी
कर्मचारियों का कहना है कि विभाग द्वारा इन आवश्यक संसाधनों के लिए फरवरी 2026 में बजट की मांग की जा रही है, ऐसे में तब तक कर्मचारियों को वेतन से वंचित रखना तर्कसंगत नहीं है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे उच्चाधिकारियों को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।