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    प्रयागराज में यमुना नदी पर बनेगा नया रेलवे पुल, आधुनिक तकनीक के ब्रिज को कुंभ 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य

    By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Sat, 07 Mar 2026 05:40 PM (IST)

    प्रयागराज में यमुना नदी पर एक नया रेलवे पुल बनेगा, जिसे कुंभ 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य है। यह पुल दिल्ली-हावड़ा के बीच तीसरी लाइन को जोड़ेगा और आधुन ...और पढ़ें

    प्रयागराज में रेलवे की ओर से नए यमुना पुल के लिए तैयार किया गया नया अलाइनमेंट का मैप। सौ. सीपीआरओ

    प्रयागराज में रेलवे की ओर से नए यमुना पुल के लिए तैयार किया गया नया अलाइनमेंट का मैप। सौ. सीपीआरओ

    HighLights

    1. जम्मू-कश्मीर में चिनाब रेल पुल की तर्ज पर 'स्फेरिकल बेयरिंग' तकनीक से बनेगा

    2. दिल्ली-हावड़ा के बीच प्रयागराज-पीडीयू तीसरी लाइन को जोड़ेगा नया पुल

    3. प्रस्ताव तैयार, बोर्ड से अनुमति पर काम शुरू होगा, पुराना पुल 150 वर्ष पुराना

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। संगम नगरी में रेल यातायात की सुगमता और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए भारतीय रेलवे ने एक महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए प्रयागराज में यमुना नदी पर एक नया रेल पुल बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह पुल न केवल यातायात को गति देगा, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना भी होगा।

    150 वर्ष पुराना हो चुका है यमुना रेल ब्रिज

    वर्तमान में यमुना पर बना रेल पुल वर्ष 1865 का बना है, जो अपनी सेवा के 150 वर्ष पूरा कर चुका है। आगामी 30-40 वर्षों में इसके रिटायरमेंट को देखते हुए नए विकल्प की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है। नया पुल कोठा पारचा डाट पुल (रामबाग) से शुरू होकर लाउडर रोड और ईसीसी (ईविंग क्रिश्चियन कालेज) होते हुए नैनी के शुआट्स तक बनेगा। लगभग 1546 मीटर लंबे इस पुल के बन जाने से दिल्ली-हावड़ा के बीच तीसरी और चौथी लाइन बिछाने का रास्ता साफ हो जाएगा।

    'स्फेरिकल बेयरिंग' तकनीक से बनेगा नया पुल 

    इस पुल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी तकनीक होगी। इसे जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध चिनाब रेल पुल की तर्ज पर 'स्फेरिकल बेयरिंग' तकनीक से बनाया जाएगा। यह पुल 8 से 9 रिक्टर स्केल की तीव्रता वाले भूकंप, भीषण विस्फोट और चक्रवाती तूफानों को झेलने में सक्षम होगा। इसमें सिस्मिक अरेस्टर हर खंभे पर लगे होंगे, ये यंत्र भूकंप के झटकों को सहन कर लेंगे। सिलिकान ग्रीस और स्लाइडिंग मैटेरियल के प्रयोग से यह 30 वर्ष तक बिना किसी मरम्मत के काम करेगा।

    रेलवे ने इस परियोजना को 'अम्ब्रेला वर्क' में किया शामिल 

    रेलवे ने इस परियोजना को 'अम्ब्रेला वर्क' (त्वरित गति से होने वाले कार्य) में शामिल किया है। इसका प्राथमिक लक्ष्य कुंभ 2031 है, ताकि मेले के दौरान आने वाली भारी भीड़ और अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन निर्बाध रूप से हो सके।

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    एक ही गर्डर पर दो रेल लाइनें बिछाई जाएंगी

    यह प्रयागराज का दूसरा ऐसा पुल होगा जिसके एक ही गर्डर पर दो रेल लाइनें बिछाई जाएंगी (जैसा दारागंज-झूंसी गंगा पुल पर है)। हालांकि पहले चरण में एक ही लाइन बिछेगी। रेलवे का अनुमान है कि यह बुनियादी ढांचा वर्ष 2050 तक की संभावित भीड़ और ट्रेनों की दोगुनी संख्या को संभालने के लिए पर्याप्त होगा। इसमें तीन'निरीक्षण पाथ' भी होंगे, जिससे समय-समय पर इसकी सुरक्षा जांची जा सकेगी। उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी के अनुसार, नए पुल को 100 वर्ष की अवधि को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है।

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