Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    प्रदेश में बेसिक स्कूलों के शिक्षक फोटो भेजकर बताएंगे- कैसा है उनके विद्यालयों का शौचालय?

    By Amlendu Tripathi Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Sat, 07 Mar 2026 04:30 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में अब शिक्षक शौचालयों की फोटो प्रेरणा पोर्टल पर भेजेंगे। शौचालयों की कमियों को दूर कर फोटो अपलोड करने का निर्देश दिया ग ...और पढ़ें

    फोटो भेजकर स्कूल के शौचालय का हाल बताएंगे शिक्षक।

    फोटो भेजकर स्कूल के शौचालय का हाल बताएंगे शिक्षक।

    HighLights

    1. प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड फोटो से प्रदेशभर के स्कूलों की समीक्षा

    2. प्रयागराज के 99.93 प्रतिशत स्कूलों में बालिका शौचालय का दावा

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में बालिका शौचालयों को दुरुस्त करने और उनका हाल बताने का निर्देश मिला है। प्रत्येक विद्यालय को अपने यहां के शौचालय की फोटो अनिवार्य रूप से अपलोड करनी है। लापरवाही पर जवाबदेही तय की जाएगी। स्कूल शिक्षा महानिदेशक ने पत्र जारी कर सभी बीएसए और बीईओ को इस संबंध में दिशा निर्देश दिए हैं।

    कमियां दूर कर शौचालय की फोटो करनी है अपलोड 

    प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड की गई बालिका शौचालयों की तस्वीरों की निरंतर समीक्षा की जा रही है। जनपद के परिषदीय विद्यालयों द्वारा अपलोड की गई फोटो में प्राय: देखा जाता है कि शौचालय का दरवाजा बंद होता है, प्रकाश का अभाव होता है। सीट व फर्श पर गंदगी रहती है। अब हर हाल में सभी कमियों को दूर कर शौचालय की फोटो अपलोड करनी है। इन तस्वीरों में शौचालय का दरवाजा खुला होना चाहिए। शौचालय साफ-सुथरा हो, पानी सप्लाई की भी व्यवस्था नजर आनी चाहिए। पर्याप्त प्रकाश, कुंडी लगे होने के साथ टाइल्स भी अनिवार्य है।

    प्रयागराज के स्कूलों में शौचालय का क्या है हाल?

    इस संदर्भ में यदि प्रयागराज के स्कूलों में शौचालयों की स्थिति देखें तो पता चलता है कि यहां यह कार्य आपरेशन कायाकल्प के तहत कराया गया। पिछले सप्ताह जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में बीएसए अनिल कुमार की ओर से बताया गया कि जिले में कुल 2832 परिषदीय स्कूल हैं। इनमें से बालकों के लिए शौचालय 2829 अर्थात 99.89 प्रतिशत विद्यालयों में है। मेजा विकासखंड में 148 स्कूलों में से 147 में, सहसों के 72 स्कूलों में से 70 में ही शौचालय है।

    बालिकाओं के शौचालय में कितना हुआ कायाकल्प कार्य?

    बालिकाओं के शौचालय की बात करें तो कायाकल्प कार्य 99.93 प्रतिशत हुआ है अर्थात 2832 में से 2830 में यह सुविधा है। मेजा और सहसों विकासखंड के एक एक विद्यालय में बालिका शौचालय नहीं है। शौचालय में पानी (रनिंग वाटर) की स्थिति को देखें तो जिले भर के स्कूलों के लिए यह आंकड़ा 99.86 प्रतिशत है अर्थात 2828 स्कूलों के शौचालय में रनिंग वाटर होने का दावा है। समीक्षा बैठक में विभाग की ओर से बताया गया है कि बहादुरपुर विकासखंड में 146 स्कूल हैं, वहां के 144 स्कूल में रनिंग वाटर की सप्लाई की जा रही है।

    खबरें और भी

    प्रतापपुर में दो, नगर क्षेत्र में एक स्कूल लक्ष्य से दूर

    मेजा में मेजा और प्रतापपुर के एक एक विद्यालय में रनिंग वाटर की सप्लाई नहीं है जबकि अन्य सभी स्कूलों में यह व्यवस्था उपलब्ध है। शौचालयों के टाइलीकरण में मेजा, उरुवा का एक-एक विद्यालय, सहसों का तीन, प्रतापपुर का दो और नगर क्षेत्र का एक विद्यालय लक्ष्य से दूर है।

    284 स्कूलों में दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालय नहीं

    जनपद में 284 ऐसे परिषदीय स्कूल हैं जहां विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शौचालय नहीं। एक मात्र सैदाबाद विकासखंड है, जहां सभी 145 स्कूलों में दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालय होने का दावा किया गया। सोरांव बहादुरपुर में 77 व 78 प्रतिशत स्कूल में दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालय है, शंकरगढ़ व नगर क्षेत्र में 89 प्रतिशत, धनुपुर में 96 प्रतिशत, मेजा में 93 प्रतिशत, बहरिया में 97 प्रतिशत, जसरा में 89 प्रतिशत, चाका में 80, करछना में 88, श्रृंगवेरपुर व फूलपुर में 91 प्रतिशत स्कूलों में यह व्यवस्था उपलब्ध है।

    यह भी पढ़ें- परिषदीय स्कूलों के बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने की कार्ययोजना बताएंगे गुरुजी, अभिभावकों को करेंगे जागरूक

    यह भी पढ़ें- प्रयागराज के 100 वार्डों में 90 किमी की 55 सड़कें चकाचक होंगी, आरामदायक होगा सफर; फर्राटा भर सकेंगे वाहन