खून के धब्बे गीले कपड़े में रखने पर फंगस आने से मिट जाते हैं साक्ष्य, छूट जाते हैं अपराधी; विशेषज्ञों ने सुझाए समाधान
प्रयागराज के एमएलएन मेडिकल कॉलेज में पुलिस अधिकारियों के लिए पांच दिवसीय स्किल एनहैंसमेंट कार्यशाला शुरू हुई। इसका उद्देश्य साक्ष्य संकलन में सुधार कर ...और पढ़ें

प्रयागराज के एमएलएन मेडिकल कॉलेज में स्किल एनहैंसमेंट कार्यशाला में विचार व्यक्त करते न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल। जागरण
HighLights
प्रयागराज के एमएलएन मेडिकल कॉलेज में स्किल एनहैंसमेंट कार्यशाला
न्यायमूर्ति ने दोषसिद्धि में वृद्धि के लिए कार्यशाला को बताया महत्वपूर्ण
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। आपराधिक घटनाओं में अभियुक्तों को सजा दिलाई जा सके, इसके लिए मौके से जुटाए गए साक्ष्य और उन्हें विधि विज्ञान प्रयोगशाला तक भेजने के तरीके महत्व रखते हैं। तमाम अपराधी अक्सर साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट से बरी हो जाते हैं, ऐसे में पीड़ित पक्ष के साथ न्याय नहीं हो पाता। जैसे हत्या के किसी मामले में मौके से खून के धब्बे कभी-कभी गीले कपड़े में जुटाए जाते हैं, इससे कपड़े में फंगस हो जाती है और साक्ष्य मिट जाते हैं।
स्किल एनहैंसमेंट कार्यशाला में बताए समाधान
विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ के अनुसार साक्ष्यों के अभाव में लगभग 80 प्रतिशत अपराधी छूट जाते हैं। 20 प्रतिशत को ही सजा हो पाती है। इस संदर्भ में मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक मेडिसिन टॉक्सिकोलॉजी विभाग और पुलिस के उच्चाधिकारियों ने संयुक्त रूप से पहल की। प्रो. प्रीतम दास प्रेक्षागृह में पांच दिवसीय स्किल एनहैंसमेंट कार्यशाला शुरू हुई जो मेडिको लीगल मामलों में पुलिस अधिकारियों और निरीक्षकों को साक्ष्य जुटाने की दृष्टि से काफी समृद्ध करेगी।
न्यायमूर्ति ने फॉरेंसिक प्रशिक्षण का अभाव बताया
कार्यशाला का उद्घाटन सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल और पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने किया। न्यायमूर्ति देशवाल ने कहा कि पुलिस कर्मियों और अधिकारियों में फॉरेंसिक प्रशिक्षण का अभाव दिखता है। वैज्ञानिक और निष्पक्ष मेडिको लीगल जांच न्यायिक प्रक्रिया की आधारशिला है। यदि डॉक्टर और पुलिस समन्वित रूप से वैज्ञानिक साक्ष्यों का संकलन और विश्लेषण करें तो न्यायालयों में दोषसिद्धि की संभावना बढ़ती है। ऐसे में निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों की भी प्रभावी सुरक्षा होती है।
जांच अधिकारियों के प्रशिक्षण की आवश्यकता
उन्होंने कहा कि जांच अधिकारियों में साक्ष्य को संकलित करने का प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है। पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने कहा कि आपराधिक घटनाओं के बदलते स्वरूप के साथ पुलिस के कार्यों में भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाना समय की आवश्यकता है। कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस कर्मियों व अधिकारियों की जांच क्षमता को अधिक प्रभावी बनाएंगे। साथ ही विवेचना की गुणवत्ता बढ़ेगी।
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दोषसिद्धि का प्रतिशत 20 से 90 प्रतिशत ले जाना लक्ष्य
मानव के साथ जो भी आपराधिक घटनाएं होती हैं उसमें घटनास्थल से साक्ष्य को पहचानने, उन्हें संकलित करने के वैज्ञानिक तरीके, महत्वपूर्ण साक्ष्य क्या होने चाहिए, उन्हें सील करके विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजने, पैक करते समय जरूरी सावधानी, परिवहन और जांच के दायरे में लाने के तरीके को समझना पुलिस अधिकारियों तथा कर्मचारियों के लिए जरूरी है। सभी को उचित न्याय मिले, अभियुक्त साक्ष्य के अभाव में छूटने न पाए। इसके लिए फॉरेंसिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कहा कि साक्ष्यों के अभाव में 80 प्रतिशत अभियुक्त छूट जाते हैं 20 प्रतिशत को ही सजा मिल पाती है, इसी 20 प्रतिशत को बढ़ाकर 80 और 90 प्रतिशत तक ले जाने का उद्देश्य है।
डाॅ. आदर्श कुमार, निदेशक विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ
100 करोड़ रुपये से होना है फॉरेंसिक लैब का उच्चीकरण
विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ के निदेशक ने बताया है कि प्रयागराज समेत उत्तर प्रदेश में 12 प्रयोगशालाएं क्रियाशील हैं। इनमें आधुनिक उपकरण, नवीन तकनीक, विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार ने 100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। कार्य हो रहे हैं, जल्दी ही प्रयोगशालाओं को पहले से अधिक समृद्ध कर लिया जाएगा।
प्रत्येक दिन 250 निरीक्षक, उप निरीक्षकों को देंगे प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यशाला में पांच दिनों में 1150 उप निरीक्षक/ निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाना है। 250-250 अधिकारियों का बैच बनाया गया है। पहले दिन 250 अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। आगे भी यही क्रम बना रहेगा।
न्याय की गुणवत्ता बढ़ाएगा प्रशिक्षण
कार्यक्रम की अध्यक्षता मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. डा. एके वर्मा ने की। उन्होंने कार्यशाला के लिए फाॅरेंसिक मेडिसिन विभाग को बधाई दी। कहा कि इस तरह की कार्यशाला न केवल पुलिस अधिकारियों का कौशल बढ़ाएगी बल्कि आमजन को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वरिष्ठ फॉरेंसिक विशेषज्ञ और पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. वीबी सहाय, फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टाक्सिकोलाजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अर्चना कौल, आयोजन सचिव डा. राजेश कुमार राय ने भी विचार व्यक्त किए। डॉ. विक्रम निगम, डॉ. कचनार वर्मा, डॉ. मानसिंह, डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह आदि उपस्थित रहे।