प्रयागराज में फर्जीवाड़ा : अधूरी सड़क का PWD ने कर दिया 54 लाख का भुगतान, सीडीओ ने डीडीओ को सौंपी जांच
प्रयागराज में PWD द्वारा अधूरी सड़क के लिए 54 लाख रुपये के भुगतान मामले में सीडीओ हर्षिका सिंह ने डीडीओ जीपी कुशवाहा की टीम को जांच सौंपी है। जिलाधिका ...और पढ़ें

प्रयागराज में आधी-अधूरी बनी सड़क का भुगतान करने के मामले में कई अफसर जांच के दायरे में हैं। ं
HighLights
जिलाधिकारी के निर्देश पर तकनीकी टीम पहले से ही कर रही जांच
कई अफसर जांच के दायरे में, कोरांव के ग्रामीणों ने की थी शिकायत
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। यमुनापार में कोरांव तहसील क्षेत्र के सुहास गांव में बिसरी संपर्क मार्ग को आधी-अधूरी बनाकर भुगतान करा लेने के मामले में सीडीओ हर्षिका सिंह ने डीडीओ जीपी कुशवाहा की टीम को जांच सौंपी है। डीएम मनीष कुमार वर्मा ने सीडीओ को इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने के लिए कहा था, जिसके बाद टेक्निकल टीम को लगाया। अब इसमें डीडीओ की टीम को भी लगा दिया गया है। पूरी जांच की निगरानी खुद सीडीओ को करने के लिए कहा गया है।
कोरांव का हे मामला
लोक निर्माण विभाग की ओर से सड़कों के निर्माण, नवनिर्माण व मरम्मत कार्य में अनियमितता के मामले में तो अक्सर सामने आते रहते हैं मगर कोरांव के बिसरी संपर्क मार्ग में बिना काम पूरा कराए ही 54 लाख रुपये का भुगतान के मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कड़े तेवर दिखाए हैं।
सीडीओ ने डीडीओ को सौंपी जांच
इस पर डीएम ने सीडीओ की निगरानी में उच्च स्तरीय कमेटी से जांच कराने को कहा। सीडीओ ने डीडीओ को जांच कमेटी का अब अध्यक्ष बना दिया है। जांच प्रभावित न हो, इसलिए कमेटी में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को नहीं रखा गया है। डीडीओ कमेटी के साथ मौके पर जाएंगे। दो हफ्ते में जांच रिपोर्ट प्रेषित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें कई इंजीनियरों पर अब कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है।
डीएम को दिया था शिकायत पत्र
दरअसल, पूरी सड़क नहीं बनाई गई है, जितनी दूरी तक बनाई भी गई है तो सड़क की मोटाई (थिकनेस) मानक के मुताबिक नहीं है। डीएम को दिए गए शिकायती पत्र में इसका ब्योरा दिया गया है। दो किमी की सड़क के नवनिर्माण की खातिर भारी-भरकम एस्टीमेट बनाने के साथ ही इसके टेंडर में भी खेल करने का भी मामला सामने आया है।
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किया गया फर्जीवाड़ा
इस सड़क के लिए लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने चहेते ठेकेदार के साथ मिलीभगत कर इसका एस्टीमेट 1.80 करोड़ रुपये बना दिया और फिर बिलो टेंडर डलवाकर करीबी फर्म को ठेका दिला दिया। यही नहीं 54 लाख रुपये का आनन-फानन में भुगतान कर दिया।