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    भीषण गर्मी में गांवों में घरों के नलों की टोटियां सूखीं, ग्रामीण बेहाल; निदेशक पूछ रहे...कितना वसूला जल शुल्क

    By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Sat, 23 May 2026 03:43 PM (GMT+05:30)

    प्रयागराज के गांवों में जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकियां बेकार पड़ी हैं, जिससे भीषण गर्मी में ग्रामीण पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। इस बीच, पं ...और पढ़ें

    प्रयागराज में नवाबगंज के ताजपुर उर्फ भीखनपुर स्थित पानी ठंकी। जागरण

    प्रयागराज में नवाबगंज के ताजपुर उर्फ भीखनपुर स्थित पानी ठंकी। जागरण

    HighLights

    1. 408 गांवों में पेयजल आपूर्ति शुरू कराने का दावा, 50% गांवों में हैंडपंप बना सहारा

    2. पंचायती राज विभाग के निदेशक ने जनपदों से पूछा कि गांवों में कितना वसूला राजस्व

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। गंगापार में नवाबगंज के ताजपुर उर्फ भीखनपुर और बुदौना में वर्ष 2023-24 में पानी की टंकी बनवाई गई। बिजली की समस्या न हो, इसलिए सोलर सिस्टम लगवाया गया। न तो नलकूप चलता है और न टोटियों से पानी टपकता है।

    यमुनापार में करछना के मुंगारी में जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकी दो साल पहले बनी थी। पाइप लाइन अब तक नहीं बिछी। नतीजा, नल से जल का जो सपना दिखाया गया था, वह अब भी अधूरा है। अमूमन यही स्थिति पूरे जनपद की है। गांवों में पानी की किल्लत को छोड़, पंचायती राज विभाग को मिशन की परियोजनाओं से होने वाली कमाई की चिंता सता रही है।

    जल जीवन मिशन के तहत 178 पेयजल परियोजनाओं से जिले के 408 राजस्व गांवों में पेयजल आपूर्ति का दावा किया जा रहा है। जबकि, धरातल पर हकीकत कुछ और ही है। 50 फीसदी से अधिक गांवों में टोटियां सूखी पड़ी है, लेकिन इसकी जिम्मेदारों ने कभी परवाह नहीं की।

    पंचायती राज विभाग तो इससे हमेशा दूर ही रहा। अब यही विभाग जल शुल्क को लेकर फिक्रमंद नजर आ रहा है। विभाग के निदेशक ने 10 अक्टूबर 2014 को शासन की ओर से जारी एक आदेश का हवाला देते हुए जिलों से गांवों में जल शुल्क वसूली की रिपोर्ट मांगी है।

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    वर्ष 2014 के आदेश में प्रति परिवार 50 रुपये प्रतिमाह जल शुल्क वसूलने के निर्देश दिए गए थे। निदेशक ने जिला पंचायत राज अधिकारियों से पूछा है कि उनके यहां किस ब्लाक की कितनी ग्राम पंचायतों में जल शुल्क से कितना राजस्व आया। यह भी हिदायत दी है कि आंकड़े सत्यापित होने चाहिए, क्योंकि नीतिगत निर्णयों में इनका उपयोग हो सकता है।

    अभी किसी भी गांव में जल शुल्क नहीं वसूला गया है। वैसे भी परियोजनाओं का संचालन अभी 10 साल तक संबंधित एजेंसी ही करेगी।
    - सुरेंद्र सिंह परमार, एक्सईएन, जल निगम, ग्रामीण।

    गांवों में जलअशुल्क के संग्रहण का ब्योरा मांगा गया है। इसमें उच्चाधिकारियों से दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा।
    - रवि शंकर द्विवेदी, डीपीआरओ।

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