सरप्लस स्थानांतरण पर UP राजकीय शिक्षक संघ ने जताया विरोध, अपर मुख्य सचिव से आदेश निरस्तीकरण की मांग की
राजकीय शिक्षक संघ ने सरप्लस स्थानांतरण आदेशों का विरोध करते हुए अपर मुख्य सचिव से उन्हें तत्काल निरस्त करने की मांग की है। संघ ने नीति के गलत व्याख्या ...और पढ़ें

सरप्लस स्थानांतरण न रोके जाने पर राजकीय शिक्षक संघ ने हाई कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
HighLights
एसीएस को पत्र भेजकर नियमों के उल्लंघन व विषयवार पदों की अनदेखी का लगाया आरोप
संघ ने चेतावनी दी- मांगें नहीं मानी गईं तो प्रभावित शिक्षक हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे
राज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। सरप्लस के नाम पर किए गए राजकीय शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं के स्थानांतरण पर राजकीय शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश ने अपर मुख्य सचिव (एसीएस) माध्यमिक शिक्षा को ज्ञापन भेजकर गंभीर आपत्ति जताई है। आरोप लगाया कि स्थानांतरण नीति-2017 की गलत व्याख्या कर इसे 2026-27 में लागू कर स्वीकृत पद और पर्याप्त छात्र संख्या होने के बावजूद शिक्षकों को सरप्लस घोषित कर स्थानांतरित किया गया है।
ज्ञापन में स्थानांतरण आदेश निरस्त करने की मांग
ज्ञापन में 30 जून को जारी स्थानांतरण आदेशों को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई है। संघ का कहना है कि कई विद्यालयों में संबंधित विषय के पद या छात्र संख्या न होने के बावजूद शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है, जबकि जिन विद्यालयों से उन्हें हटाया गया, वहां पर्याप्त छात्र संख्या और स्वीकृत पद उपलब्ध हैं। उदाहरण के तौर पर राजकीय इंटर कालेज प्रयागराज में वाणिज्य और सामाजिक विज्ञान विषय के शिक्षकों के स्थानांतरण को नियम विरुद्ध बताया है।
संघ ने यह दावा किया
दावा किया है कि सामाजिक विज्ञान में निर्धारित मानकों के अनुसार वहां 16 शिक्षकों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 13 शिक्षक कार्यरत हैं। यह भी आरोप लगाया है कि स्थानांतरण आदेश में कार्यभार ग्रहण के लिए अवकाश और स्थानांतरण भत्ता न देने का प्रविधान असंवैधानिक है तथा इससे शिक्षकों का मानसिक उत्पीड़न हो रहा है।
यह सवाल भी उठाए गए
बताया गया कि राजकीय सैनिक इंटर कालेज सरोजनीनगर लखनऊ के इतिहास प्रवक्ता को शून्य छात्र संख्या के आधार पर हटाया गया है और राजकीय जुबिली इंटरकालेज में पदस्थ किया गया है, वहां भी इतिहास विषय में छात्र संख्या शून्य है। मीरजापुर के अभिनव विद्यालय का उल्लेख करते हुए विद्यालय बंद कर प्रवक्ताओं को सरप्लस घोषित करने के निर्णय पर भी सवाल उठाए गए हैं।
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संघ ने दी चेतावनी
इस तरह अधिकांश राजकीय विद्यालयों में गणित और विज्ञान शिक्षकों के रिक्त पद शीघ्र भरने, वैकल्पिक विषयों की मान्यता वाली विद्यालयवार सूची जारी करने तथा वर्तमान स्थानांतरण आदेश निरस्त करने की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो प्रभावित शिक्षक हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे।