उद्घाटन के 14 दिन बाद ही धंस गई लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की सड़क, उन्नाव में दो जगह पर बने गड्ढे
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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर मरम्मत का काम
HighLights
करीब 30 फीट धंसी सड़क में बन गईं लंबी-लंबी नालियां, उनमें भर गया पानी
निर्माण एजेंसी पटेल इन्फ्रास्ट्रक्चर ने शुरू कराया मरम्मत का काम
एनएचएआई के 4200 करोड़ के प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर उठे सवाल
जागरण संवाददाता, उन्नाव। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर करीब 30 फीट सड़क धंस गई है। इसका उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था और 14 दिन बाद रविवार को दो जगह सड़क धंस गई।
उन्नाव से लखनऊ की ओर जाने पर कोरारी के पास सड़क धंसने से लंबी-लंबी नालियां बन गई और उनमें पानी भर गया है। इसी लेन पर बनी टोल प्लाजा एक किमी पहले भी करीब आठ फीट सड़क धंसी है। निर्माण एजेंसी पटेल इन्फ्रास्ट्रक्चर ने यहां मरम्मत शुरू करा दी है। वाहन चालकों को सतर्क करने के लिए बैरीकेडिंग की गई है।
पहली बरसात ही नहीं झेल सकी सड़क
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसके निर्माण के लिए 4200 करोड़ की लागत से आटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन गाइडेंड कंस्ट्रक्शन (एआइएमजीसी) तकनीक का प्रयोग किया गया था। अमेरिका व जर्मन के बाद भारत में पहली बार ऐसी सड़क बनाने की बात की जा रही थी, जो पहली बरसात ही सहन नहीं कर सकी और उखड़ने लगी।
एक्सप्रेसवे की ग्रीन फील्ड के किमी. संख्या 64.200 पर कई मीटर तक सड़क का डामर पूरी तरह से उखड़ गया है। एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले यात्रियों ने इसका वीडियो बनाकर वायरल करते हुए गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं। 45 किमी. के ग्रीन फील्ड पर कई स्थानों पर बरसात के कारण डामर उखड़ा है।
इससे पहले अलग-अलग स्थानों पर सड़क के किनारे की मिट्टी बहने का मामला सामने आया था। अचलगंज के पास पहुंच मार्ग भी धंस चुका है। जगह-जगह पैचिंग के चलते यह सड़क सुगम नहीं है। पुल और पुलिया के एक्सपेंशन ज्वाइंट पर वाहन पहुंचते ही जर्क महसूस होता है। एक्सप्रेसवे के प्रोजेक्ट मैनेजर वी. कुंडू ने बताया कि बरसात में कुछ जगहों पर दिक्कत आई है, जिसे सही करवाया जा रहा है। नया निर्माण है, इसलिए समस्या आ रही है। कहीं यातायात बाधित नहीं है।
पहली बरसात में सड़क का डामर कई जगह से उखड़ने कैसे लगा
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जुलाई 2026 को ही इस एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया था। यही नहीं उन्नाव से लखनऊ तक एक्सप्रेसवे पर सफर भी किया था और दावा किया था एक्सप्रेसवे बहुत ही अच्छा बनाया गया है। अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि अगर अच्छा था तो पहली बरसात में सड़क का डामर कई जगह से उखड़ने कैसे लगा। निर्माण के दौरान क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने निरीक्षण करना उचित नहीं समझा, जो अब सड़क उखडने लगी है।
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एक्सप्रेसवे के दाएं व बाएं मिट्टी बहने का प्रकरण
इससे पहले दैनिक जागरण ने एक्सप्रेसवे के दाएं व बाएं मिट्टी बहने का प्रकरण उठाया था। बरसात के कारण काफी मिट्टी बह गई थी और बाद में एनएचएआइ ने अतिरिक्त मिट्टी मौके पर डलवाई थी। यही नहीं बैरिकेडिंग के लिए जो लोहे की जाली लगवाई गई थी, उन्हें भी कई स्थानों से ग्रामीण काट ले गए थे। इससे मवेशी जाली के रास्ते एनएचएआइ के परिसर में प्रवेश कर रहे हैं।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा ने बताया कि ग्रीन फील्ड पर सड़क का स्लिपेज यानी डामरीकरण जो किया गया था, वह उखड़ गया है। यह कैसे हुआ है, इसकी जांच कराई जा र है। फिलहाल मौके पर मरम्मत से जुड़ा कार्य कराया जा रहा है। कार्यदायी संस्था की मेंटेंनस टीम लगी हुई है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (नेशनल एक्सप्रेसवे 6 - NE-6) 63 किलोमीटर लंबा और 6-लेन का हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल कॉरिडोर है, जिसका उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को किया गया था। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच का सफर अब सिर्फ 35 से 40 मिनट में पूरा हो जाता है, जो पहले लगभग दो से तीन घंटे का होता था।