महिला कांवड़िया और पुरुष कांवड़िया में कोई शास्त्रीय भेद है? काशी के ज्योतिषाचार्य ने स्पष्ट की स्थिति, आप भी जान लें
काशी के ज्योतिषाचार्य डॉ. कमलेश झा ने स्पष्ट किया है कि महिला कांवड़ियों और पुरुष कांवड़ियों में कोई शास्त्रीय भेद नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि महिलाए ...और पढ़ें

महिला कांवड़ियों और पुरुष कांवड़ियों में कोई शास्त्रीय भेद नहीं: ज्योतिषाचार्य।
HighLights
महिला कांवड़ियों और पुरुष कांवड़ियों में कोई शास्त्रीय भेद नहीं।
स्वस्थ और सुरक्षित महिलाएं श्रद्धापूर्वक कांवड़ यात्रा कर सकती हैं।
शिवपुराण में कई शिवभक्त महिलाओं का उल्लेख मिलता है।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। सावन माह अब मात्र बीस दिन शेष है, जबकि कांवड़ियों की सक्रियता अभी से नजर आने लगी है। हर साल महिला कांवड़ियों की संख्या में वृद्धि होती जा रही है। इस संदर्भ में काशी के ज्योतिषाचार्य डॉ. कमलेश झा (प्राचार्य) रानी पद्मावती तारा योगतंत्र आदर्श संस्कृत महाविद्यालय ने बताया कि शिव सभी के हैं। इसलिए कांवड़िया के रूप में महिलाओं का कांवड़ उठाना कहीं से भी अनुचित नहीं है।

महिला कांवड़िया और पुरुष कांवड़िया के बीच शास्त्रीय भेद का प्रश्न आधुनिक समय में अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। इसका उत्तर स्पष्ट है- शास्त्रों में भगवान शिव की उपासना पर महिलाओं का कोई सामान्य निषेध नहीं है। शिवपुराण तथा अन्य ग्रंथों में अनेक शिवभक्त महिलाओं का उल्लेख मिलता है। पावन तीर्थ यात्रा में स्वयं शिवभक्त की सर्वोच्च आदर्शता है।
अतः यदि महिला स्वस्थ हो, सुरक्षित वातावरण में यात्रा कर सके, श्रद्धा एवं नियमों का पालन करे, तो वह कांवड़ यात्रा कर सकती है। हां, यदि स्वास्थ्य, गर्भावस्था, अत्यधिक भीड़ या अन्य परिस्थितियों में कठिनाइयाँ हों, तो घर अथवा निकटवर्ती शिवालय में भी श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक करना समान रूप से पुण्यकारी माना गया है।
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महिलाओं की कांवड़ यात्रा को लेकर समाज में विभिन्न मत हैं। कुछ लोग इसे अनुचित मानते हैं, जबकि अन्य इसे एक धार्मिक कर्तव्य के रूप में देखते हैं। डॉ. झा ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि महिलाएं अपनी श्रद्धा के अनुसार निर्णय लें और अपनी सुरक्षा सामर्थ्य का ध्यान रखें।
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महिलाओं की कांवड़ यात्रा की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि समाज में बदलाव आ रहा है। महिलाएं अब धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं, जो कि एक सकारात्मक संकेत है। यह न केवल उनकी आस्था को दर्शाता है, बल्कि समाज में उनकी भूमिका को भी मजबूत करता है।
कांवड़ यात्रा का महत्व केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक भी है। जब महिलाएं इस यात्रा में भाग लेती हैं, तो यह दर्शाता है कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं और समाज में अपनी पहचान बना रही हैं। कांवड़ यात्रा में महिलाओं की भागीदारी को एक सकारात्मक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। यह न केवल उनके धार्मिक अधिकारों का सम्मान है, बल्कि यह समाज में समानता और समरसता की दिशा में एक कदम भी है।