रानीखेत में द्वारसों के जंगल में भीषण आग, 20 हेक्टेयर वन क्षेत्र जला
रानीखेत के द्वारसों जंगल में भीषण आग लग गई, जिससे लगभग 20 हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर खाक हो गया। हालिया बारिश से मिली राहत के बाद, लगातार धूप के कारण नम ...और पढ़ें

बीती रात सड़क किनारे आग सेंकने या खुराफातियों के वन क्षेत्र को जलाने की आशंका. Jagran
HighLights
द्वारसों जंगल में 20 हेक्टेयर वन क्षेत्र जला
मानवजनित आग से वन संपदा को भारी नुकसान
वन्यजीवों के आबादी की ओर आने का खतरा बढ़ा
जागरण संवाददाता, रानीखेत। हालिया बारिश व बर्फबारी से वन क्षेत्रों को आग से काफी हद तक राहत मिली थी। मगर इस बीच लगातार धूप से नमी कम होते ही पर्वतीय क्षेत्रों में मानवजनित वनाग्नि फिर परेशान करने लगी है।
द्वारसों का चीड़ बहुल जंगल बीती रात भीषण आग की चपेट में आ गया। लगभग 20 हेक्टेयर वन क्षेत्र लपटों से पूरी तरह जल गया। बड़े पैमाने पर वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। वहीं वासस्थलों तक तपिश पहुंचने से वन्यजीवों का आबादी की ओर रुख करने का खतरा भी सताने लगा है।
लाख प्रयासों व जनजागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद वनाग्नि की घटनाएं रुक नहीं रहीं। अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ, चंपावत व नैनीताल जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में अब तक आग की 65 से ज्यादा घटनाएं और 290 हेक्टेयर के आसपास जंगल जल चुके हैं।
नवंबर मध्य बाद वनों में शुरू आग का कहर जनवरी दूसरे पखवाड़े वर्षा व हिमपात से थमा था। मगर धूप खिलने के बाद चीड़ बहुल वन क्षेत्रों में पीरूल व घास के सूखते ही आग का जोखिम फिर बढने लगा है।
यहां अल्मोड़ा मजखाली हाईवे से लगा द्वारसों का जंगल बीती रात धधक उठा। हवा के कारण लपटें बेकाबू हो गईं और चार से पांच किमी के दायरे में 20 हेक्टेयर के आसपास जंगल जल गया। आशंका है कि रात में उधर से गुजर रहे वाहन सवारों ने रोड किनारे आग सेंकने के बाद उसे जलता छोड़ दिया।
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हवा से चिंगारी भड़कने से सूखे पीरूल व घास ने आग पकड़ ली, जिससे जंगल चपेट में आ गया। वन क्षेत्राधिकारी तापस मिश्रा ने कहा कि वन क्षेत्रों को क्षति पहुंचाने वाले पकड़े गए तो जुर्माना व कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से वनों को आग से बचाने में सहयोग देने की अपील की है।