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    चारधाम यात्रा के लिए अप्रैल में निकलेगी बसों की लॉटरी, जानें कब खुल रहे धामों के कपाट‌?

    Updated: Sun, 08 Mar 2026 08:51 AM (IST)

    चारधाम यात्रा के लिए अप्रैल के पहले सप्ताह में बसों की लॉटरी निकाली जाएगी। संयुक्त रोटेशन यातायात व्यवस्था समिति 2200 से अधिक बसों में से 60% यात्रा म ...और पढ़ें

    HighLights

    1. अप्रैल के पहले सप्ताह में बसों की लॉटरी

    2. 60% बसें चारधाम यात्रा मार्गों पर चलेंगी

    3. संयुक्त रोटेशन के पास 2200 से अधिक बसें

    जागरण संवाददाता, ऋषिकेश । चारधाम यात्रा के लिए संयुक्त रोटेशन यातायात व्यवस्था समिति अप्रैल पहले सप्ताह में लॉटरी प्रक्रिया करेगी। लॉटरी में निकले नंबरों के आधार पर बसों को यात्रा पर भेजा जाता है। इस बार भी साठ प्रतिशत बसों को यात्रा और 40 प्रतिशत बसों को लोकल रूट में संचालित किया जाएगा। जिससे स्थानीय लोगों को भी समस्या न आए।

    चारधाम यात्रा में धामों में यात्रियों को भेजने की व्यवस्था 10 परिवहन कंपनियों से बनी संयुक्त रोटेशन के जिम्मे रहता है। हरिद्वार और ऋषिकेश से अधिकांश बसें यात्रा में भेजी जाती है। इस बार 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की शुरुआत हो जाएगी। 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। संयुक्त रोटेशन की ओर से भी तैयारी शुरू कर दी गई है।

    अप्रैल के पहले सप्ताह में यात्रा पर जाने वाली बसों के लिए लॉटरी प्रक्रिया होगी। लॉटरी में बसों के नंबर निकाले जाते हैं। उसी के अनुरूप बसें यात्रा रूट पर जाती हैं। संयुक्त रोटेशन के अध्यक्ष भास्करानंद भारद्वाज ने बताया कि अप्रैल पहले सप्ताह में लॉटरी निकाली जाएगी। उन्होंने बताया कि संयुक्त रोटेशन के पास 2200 से अधिक बसें हैं। जिनमें से 60 प्रतशत बसें यात्रा और 40 प्रतितश बसें लोकल रूट पर चलेंगी।

    यह परिवहन कंपनियां हैं संयुक्त रोटेशन में

    जीएमओयू, टीजीएमओ, यातायात, सीमांत सहकारी संघ, गढ़वाल मंडल कांट्रैक्ट कैरिज, रूपकुंड पर्यटन विकास संघ, दून वैली कांट्रेक्ट कैरिज, गढ़वाल मंडल बहुद्देश्यीय व यूजर्स रामनगर, हरिद्वार कांट्रेक्ट

    वर्ष 1971 में हुई संयुक्त रोटेशन की स्थापना

    संयुक्त रोटेशन की वर्ष 1971 में स्थापना की गई थी। उसके बाद से कुछ मौकों को छोड़कर हर बार संयुक्त रोटेशन का गठन किया जाता है। वर्ष 1998 में संयुक्त रोटेशन का गठन नहीं हो पाया। वर्ष 2013 में भी कुछ कंपनियों ने संयुक्त रोटेशन से किनारा कर दिया। उस साल बड़ी संख्या में यात्री पहुंचे थे। प्रशासन के लिए व्यवस्था संभालना मुश्किल हो गया था।

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    जून 2013 में आपदा के कारण यात्रा ठप पड़ गई। शुरुआत में संयुक्त रोटेशन में तीन परिवहन कंपनियां जीएमओ, टीजीएमओ और यातायात कंपनी थी। तब उनके पास 103 बसें थी। अब संयुक्त रोटेशन के पास करीब 2200 बसों का बेड़ा है।

    समय के साथ बढ़ी चुनौती

    समय के साथ परिवहन कंपनियों को कई चुनौतियों से भी जूझना पड़ रहा है। अब बाहर से भी व्यावसायिक वाहन यात्री लेकर आते हैं। कई लोग अपने निजी वाहनों से यात्रा पर जाते हैं। इससे स्थानीय परिवहन कारोबारियों को नुकसान झेलना पड़ता है।

    ऋषिकेश में परिवहन का कारोबार मुख्यतौर पर यात्रा में मई, जून के महीने में टिका होता है। परिवहन कंपनियां भी डग्गामार वाहनों को रोकने की मांग उठा चुकी है। हर बैठक में उनकी ओर से यह मांग उठाई जाती रही है।

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