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    सरलीकरण से संतुष्टीकरण के मंत्र की साधना, सीएम धामी ने इन 5 कठोर फैसलों से दिल में बनाई जगह

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 08:50 AM (GMT+05:30)

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने पांच साल के कार्यकाल में उत्तराखंड को राजनीतिक स्थिरता दी और कई कठोर निर्णय लिए। ...और पढ़ें

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

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    संक्षेप में पढ़ें

    रविंद्र बड़थ्वाल, देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का प्रदेश के मुखिया के तौर पर लगातार पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा कर और मजबूती के साथ आगे बढ़ना, राजनीतिक अस्थिरता के भंवर में गोते खाते रहे प्रदेश को स्थिरता की नई राह पर ले जाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है ही, साथ में पार्टी हाईकमान, संगठन और आमजन के भरोसे की रूमानी पटकथा भी है।

    जिसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कठोर निर्णयों और सरलीकरण से संतु़ष्टीकरण से समाधान की राह पर चलने की इच्छाशक्ति की परिणति भी माना जा सकता है।

    समान नागरिक संहिता, मतांतरण पर सख्ती, सशक्त भू-कानून, नकलरोधी कानून समेत देवभूमि के स्वरूप और संस्कृति को ध्यान में रखकर उठाए गए ऐतिहासिक कदम अब देश के लिए मिसाल बने हैं तो समान नागरिक संहिता के रूप में महिला अधिकारों एवं समान कानून की की गंगा के लिए धामी भगीरथ बन गए।

    सशक्त और विकसित उत्तराखंड की मजबूत आधारशिला के लिए भी ढांचागत सुविधाओं के विस्तार की ललक अब बढ़कर नए प्रतिमान गढ़ना चाहती है।

    लैंड जिहाद पर धामी सरकार का वार, 12000 एकड़ भूमि कराई कब्जामुक्त

    देवभूमि की पावन धरती को कब्जों और जनसांख्यिकी बदलाव की साजिशों से मुक्त कराने के लिए धामी सरकार का अतिक्रमण हटाओ अभियान बदस्तूर जारी है। पिछले तीन साल से चल रही इस मुहिम के तहत अभी तक प्रदेश में 12,000 एकड़ सरकारी व वन भूमि को कब्जामुक्त कराया जा चुका है। साथ ही सड़कों के किनारे और वन भूमि पर हुए धार्मिक अतिक्रमणों पर भी सरकार ने बुलडोजर चलाने में कोई लिहाज नहीं बरता है।

    मुख्यमंत्री धामी साफ कर चुके हैं कि देवभूमि की अस्मिता और सरकारी संपत्ति पर डाका डालने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही सरकार ने यह भी सख्त निर्देश दिए हैं कि मुक्त कराई गई भूमि पर यदि फिर से अतिक्रमण हुआ तो इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

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    अप्रैल, 2023 से अब तक हुई कार्रवाई

    • 12,000 एकड़ सरकारी और वन भूमि कराई कब्जामुक्त।
    • 582 अवैध मजारें हटाई गईं।
    • 258 अवैध मदरसे हुए बंद।
    • 09 मस्जिदें सरकारी भूमि से हटाईं।
    • 42 अन्य धार्मिक संरचनाएं भी हटाई गईं।


    आपरेशन कालनेमि : राडार पर असामाजिक तत्व
    धामी सरकार राज्य की आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी बेहद गंभीर है। इसी कड़ी में राज्य में आपरेशन कालनेमि चलाया जा रहा है। इसके तहत अपनी असली पहचान छिपाकर सनातन धर्म, संतों और स्थानीय शांति को प्रभावित करने वाले असामाजिक तत्वों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि राज्य के सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।

    सशक्त भू कानून: उल्लंघन पर सरकार में निहित होगी भूमि
    राज्य की भूमि पर भू माफिया की गिद्ध दृष्टि और जन भावनाओं ने राज्य सरकार को आखिरकार कड़ा भू-कानून बनाने के लिए बाध्य किया। परिणामस्वरूप इसी वर्ष उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 (अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश 2001) (यथा उत्तराखंड राज्य में प्रवृत्त) संशोधन अधिनियम मई, 2025 से अस्तित्व में आया।

    इस कानून के अनुसार कोई भी बाहरी व्यक्ति हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर को छोड़कर शेष 11 जिलों में कृषि व बागवानी के लिए भूमि खरीद नहीं कर सकता। नगर निकाय क्षेत्रों से बाहर यानी ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय उपयोग के लिए बाहरी व्यक्ति 250 वर्गमीटर केवल आवासीय उपयोग के लिए खरीद सकते हैं। भूमि खरीदने वाले को शपथ पत्र भी देना होगा। भू-कानून का उल्लंघन हुआ तो खरीदी गई भूमि सरकार में निहित होगी।

    मतांतरण पर कड़ा किया कानून
    मतांतरण को लेकर बहुचर्चित छांगुर प्रकरण सामने आने के बाद धामी सरकार ने मतांतरण कानून को और सख्त बनाया। राज्य में उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता एवं विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम में संशोधन कर इसमें 10 लाख रुपये तक का जुर्माना के साथ ही आजीवन कारावास का प्रविधान किया है। इसके साथ ही अन्य कई प्रविधान भी कड़े किए गए हैं।

    शीतकालीन अथवा बारहमासी पर्यटन
    उत्तराखंड में अभी तक चारधाम यात्रा गर्मियों में ही संचालित होती रही है। अब शीतकाल के दौरान चारधाम के समस्त गद्दीस्थलों में यात्रा को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही अन्य शीतकालीन पर्यटन को भी व्यवस्थित करते हुए विस्तार देने की पहल वर्ष 2025 से हुई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसे गति देने स्वयं उत्तराखंड पहुंचे थे।

    अन्य धार्मिक यात्राओं व मेलों के प्रबंधन और संचालन के लिए वर्षभर व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। एक जिला एक मेला थीम पर पर्यटकों को लुभाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। धामी सरकार ने उत्तराखंड धर्मस्व एवं तीर्थाटन परिषद का गठन किया गया। शुरुआती दौर में इसके परिणाम दिखाई दिए हैं। इससे आने वाले वर्षों में शीतकालीन पर्यटन में बड़ी वृद्धि संभावित है।

    राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी
    उत्तराखंड ने वर्ष 2025 में 38वें राष्ट्रीय खेलों की सफल मेजबानी की है। इन खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की योजना प्रारंभ की गई। इस आयोजन ने राज्य में खेलों के लिए वातावरण सृजन और खिलाड़ियों को बेहतर भविष्य की उम्मीद जगाई है। राष्ट्रीय खेलों के लिए विकसित की गईं अवस्थापना सुविधाओं के उपयोग की कार्ययोजना पर सरकार गंभीर है। इससे खेलों का विकास होगा और खिलाड़ियों को भी उचित अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।

    पूर्ण मंत्रिमंडल ने लिया आकार
    धामी मंत्रिमंडल ने इस वर्ष पूर्ण आकार ले लिया। वर्ष 2022 में प्रदेश सरकार की कमान संभालने के बाद से ही मंत्रिमंडल में सदस्यों के तीन पद रिक्त थे। बाद में इनकी संख्या बढ़कर पांच हो गई थी। मंत्रिमंडल में विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं लंबे समय तक सियासी गलियारों में तैरती रहीं, लेकिन प्रदेश की सत्ता के शिखर पर मजबूती से बैठे मुख्यमंत्री धामी की दृढ़ इच्छाशक्ति काम कर गई और मंत्रिमंडल की सभी रिक्त सीटों को उनके सुझाव के अनुसार भर दिया गया।

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