सीएम धामी के पांच साल: समान नागरिक संहिता का वायदा, तीन वर्ष में बन गया देश में मिसाल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के वायदे के अनुरूप उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू हुई, जो देश के लिए एक मिसाल बन गई है। इसके तहत बहुविवाह पर रोक ल ...और पढ़ें

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, देहरादून। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के रूप में उत्तराखंड की पहल आज पूरे देश के लिए मिसाल बन गई है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जब समान नागरिक संहिता का वायदा किया था तो इस वायदे के जल्द धरातल पर उतरने का यकीन करना आसान नहीं था।
इस वायदे के बूते मुख्यमंत्री धामी पर मतदाताओं ने अपना प्यार लुटाया तो उन्होंने भी तुरंत इस कानून को बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाकर और फिर तीन वर्ष के भीतर से प्रभावी ढंग से लागू कर दिया। आज उत्तराखंड के दिखाए रास्ते पर गुजरात, असम और बंगाल ने कदम बढ़ा दिए हैं।
27 जनवरी 2025 में लागू की गई यूसीसी
उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 में यूसीसी लागू की गई। इसे लागू करने वाला यह देश का पहला राज्य भी बना। इसे लागू हुए डेढ़ वर्ष हो गया है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इससे प्रदेश में बहुविवाह प्रथा में रोक लगी है तो वहीं, बेटियों को भी पैतृक संपत्ति में पूरा अधिकार मिला है।
अब वसीयत के पंजीकरण की व्यवस्था को कानूनी जाम पहचाना से इसमें गड़बड़ी की आशंकाएं भी समाप्त हुई है। लिव इन का पंजीकरण अनिवार्य होने से अब जोड़ों खुल कर सामने आ रहे हैं। इससे उनकी सामाजिक व व्यक्तिगत सुरक्षा भी पुख्ता हुई है।
समान नागरिक संहिता में विवाह, विवाह विच्छेद व लिव इन का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। साथ ही पैतृक संपत्ति में महिलाओं को भी पुरुषों के समान अधिकार दिया गया है। मृतक की संपत्ति पर पत्नी व बच्चों के साथ ही माता-पिता का भी अधिकार रखा गया है। यूसीसी के लागू होने के बाद प्रदेश में इसे खुले हाथ लिया गया है।
खबरें और भी
अभी स्थिति यह है कि प्रदेश में 4,54,100 व्यक्तियों ने नए विवाह का पंजीकरण कराया है जबकि 88775 ने पूर्व में हुए विवाह की जानकारी दी है। यानी अब तक 54.28 लाख से अधिक व्यक्ति इसके तहत यूसीसी के तहत अपना विवाह पंजीकरण करा चुके हैं। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।