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    उत्तराखंड में आखिर हेलीकॉप्टर को क्यों करनी पड़ी थी इमरजेंसी लैंडिंग? अचानक बने डाउनड्रिफ्ट बनी वजह

    Updated: Thu, 21 May 2026 05:00 PM (IST)

    बदरीनाथ से देहरादून लौट रहे एक हेलीकॉप्टर को खराब मौसम और घाटी में अचानक डाउनड्रिफ्ट के कारण आपात लैंडिंग करनी पड़ी। ...और पढ़ें

    टिहरी के सत्यों-सकलाना क्षेत्र में बुधवार को खेतों में इमरजेंसी लैंडिंग के बाद क्षतिग्रस्त हेलीकाप्टर। कुछ दूरी पर पड़ी बिजली टूटी बिजली की तार। फोटो- साभार-पुलिस विभाग

    टिहरी के सत्यों-सकलाना क्षेत्र में बुधवार को खेतों में इमरजेंसी लैंडिंग के बाद क्षतिग्रस्त हेलीकाप्टर। कुछ दूरी पर पड़ी बिजली टूटी बिजली की तार। फोटो- साभार-पुलिस विभाग

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    राज्य ब्यूरो, देहरादून। बदरीनाथ से वापस देहरादून लौट रहे हेलीकाप्टर बुधवार को एक बड़ा हादसा उस समय टल गया, जब खराब मौसम और घाटी क्षेत्र में अचानक बने डाउनड्रिफ्ट के कारण ट्रांस भारत एविएशन के हेलीकाप्टर को आपात लैंडिंग करनी पड़ी।

    उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूसीएडीए) ने घटना की जानकारी साझा करते हुए बताया कि ट्रांस भारत एविएशन प्रा लि का बेल 407 हेलीकाप्टर नियमित दो धाम चार्टर सेवा पर था।

    इसी दौरान घाटी क्षेत्र में अचानक मौसम में परिवर्तन के कारण तेज डाउनड्रिफ्ट की स्थिति उत्पन्न हो गई। हालात को भांपते हुए हेलीकाप्टर के पायलट कैप्टन अनुपम चौधरी ने सूझबूझ का परिचय देते हुए सुरक्षित एहतियाती लैंडिंग कराई।

    यूकाडा ने बताया कि कैप्टन अनुपम चौधरी भारतीय वायुसेना की पूर्व अनुभवी पायलट हैं। उनकी सतर्कता और समय पर लिए गए निर्णय के कारण संभावित दुर्घटना टल गई।

    प्रारंभिक जांच में हेलीकाप्टर के बाहरी हिस्से में मामूली क्षति की जानकारी सामने आई है, जबकि किसी यात्री अथवा चालक दल के सदस्य को चोट नहीं आई है।

    यूकाड़ा ने कहा कि यात्रा के दौरान सुरक्षित हवाई संचालन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

    इसके तहत आइएमडी अधिकारियों की तैनाती, मौसम निगरानी के लिए मौसम विभाग का कार्यालय, आटोमेटेड वेदर स्टेशन प्रणाली, पेन टिल्ट जूम (पीटीजेड) कैमरे और अस्थायी एटीसी व्यवस्था लागू की गई है।

    साथ ही हेलीकाप्टर आपरेटरों के साथ किए गए अनुबंधों में कड़े सुरक्षा मानकों और परिचालन शर्तों को शामिल किया गया है।

    यूसीएडीए के अनुसार घटना के बाद आवश्यक तकनीकी निरीक्षण और नियामकीय प्रक्रिया संबंधित विमानन प्राधिकरणों एवं आपरेटर के समन्वय से की जा रही है।

    क्या होता है डाउनड्रिफ्ट

    पहाड़ों और संकरी घाटियों में प्राकृतिक हवाओं की दिशा और गति बदलती रहती है। पहाड़ों से नीचे की ओर बहने वाली हवा को माउंटेन डाउन ड्रिफ्ट कहते हैं।

    यदि हेलीकाप्टर किसी प्राकृतिक माउंटेन डाउनड्रिफ्ट की चपेट में आ जाए, तो हेलीकाप्टर अचानक तेज़ी से नीचे गिरने लगता है।

    इसमें यदि हेलीकाप्टर को जबरन ऊपर की ओर ले जाने पर दुर्घटना की आशंका रहती है। इस चुनौतीपूर्ण समय में पायलट को स्वविवेक से ही निर्णय लेना होता है।

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