केदारनाथ हेली सेवाओं पर अब डिजिटल निगरानी, सुरक्षा होगी मजबूत
उत्तराखंड सरकार केदारनाथ हेली सेवाओं को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू कर रही है। यूकाडा हेलीपैड पर आधुनिक सेलोमीटर और ...और पढ़ें

गत वर्ष हुई हेली दुर्घटना के दृष्टिगत बरती जा रही सावधानी. File Photo

समय कम है?
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विकास गुसाईं, देहरादून। प्रदेश सरकार इस वर्ष केदारनाथ हेली सेवाओं को और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू करने जा रही है। इसके तहत उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) हेलीपैड पर आधुनिक उपकरण सेलोमीटर लगाने और हेलीकाप्टरों में कैमरे स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। यह व्यवस्था विशेष रूप से केदारनाथ यात्रा के दौरान हवाई सेवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है। साथ ही चारों धाम के लिए संचालित होने वाली चार्टर सेवाओं में भी कैमरों के उपयोग पर विचार चल रहा है।
प्रदेश में चारधाम यात्रा के दौरान हेली सेवाओं का प्रयोग बढ़ जाता है। इस दौरान केदारनाथ के लिए नियमित शटल सेवाएं संचालित की जाती हैं, साथ ही देहरादून से शेष अन्य तीन धाम के लिए चार्टर सेवाओं का भी प्रयोग किया जाता है। गत वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान पहले चरण में पांच हेली दुर्घटनाएं हुई थीं। इनमें 13 व्यक्तियों की मौत हुई। इन दुर्घटनाओं की प्रारंभिक जांच में खराब मौसम, घने बादल, लो विजिबिलिटी और सुरक्षा नियमों की अनदेखी को जिम्मेदार माना गया।
यही कारण रहा कि दूसरे चरण में विशेष एहतियात के साथ हेली सेवाएं संचालित की गईं। इस वर्ष अब हेली सेवाओं को और अधिक सुरक्षित बनाने को कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत सिरसी, फाटा और गुप्तकाशी स्थित नौ हेलीपैड में सेलोमीटर लगाए जाएंगे। इनके माध्यम से हवाई दृश्यता, बादलों की ऊंचाई और मौसम की सटीक जानकारी प्राप्त हो सकेगी, जिससे उड़ान संचालन को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा। वहीं हेलीकाप्टर में कैमरे लगाने से उड़ान के दौरान होने वाली गतिविधियों की निगरानी संभव होगी।
इस तकनीक के लागू होने से दुर्घटना की स्थिति में त्वरित सूचना मिलने के साथ ही उसके कारणों का सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा। इन उपकरणों की खरीद को टेंडर हो चुके हैं।
इस वर्ष हेलीकाप्टर की उड़ान की जाएगी नियंत्रित
केदारनाथ सेवा के दौरान प्रदेश में इस वर्ष हेली सेवाओं को नियंत्रित करने की तैयारी है। इसके तहत गत वर्ष की भांति ही सीमित संख्या में हेली सेवाओं का संचालन किया जाएगा।
पायलट का अनुभवी होना जरूरी
इस वर्ष यूकाडा ने पायलट के लिए भी कुछ प्रविधान किए हैं। इसके तहत पायलट की आयु 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उसे पर्वतीय क्षेत्रों में 100 घंटे की सिंगल पायलट फ्लाइंग का भी अनुभव होना चाहिए।
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स्टैंड बाय हेलीकाप्टर होना जरूरी
इस बार हेली कंपनियों के पास एक स्टैंड-बाय हेलीकाप्टर होना जरूरी होगा। इसी प्रकार दो हेलीपैड से तीन और तीन हेलीपैड से हेली सेवा देने वाले के पास चार हेलीकाप्टर होने चाहिए, ताकि अपरिहार्य स्थिति में हेली सेवा प्रभावित न हो।
‘राज्य सरकार का उद्देश्य केदारनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित, विश्वसनीय और सुव्यवस्थित हेली सेवा उपलब्ध कराना है। डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू होने से हेली सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।’ -आशीष चौहान, सीईओ, यूकाडा
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