Makar Sankranti : 14 जनवरी को मनाया जाएगा मकर संक्रांति का पर्व, इसी के साथ होगा उत्तरायण का शुभारंभ
देहरादून में 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी, जब सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करेगा। यह उत्तरायण ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
14 जनवरी को मकर संक्रांति, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश।
उत्तरायण का शुभारंभ, शुभ कार्यों के लिए विशेष फलदायी।
मंदाकिनी योग का निर्माण, स्नान-दान का विशेष महत्व।
जागरण संवाददाता, देहरादून: सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश के साथ 14 जनवरी बुधवार को मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाएगा। इसी के साथ उत्तरायण का शुभारंभ होगा, जिसे सनातन परंपरा में शुभ एवं मांगलिक कार्यों की शुरुआत का प्रतीक माना गया है। इस दिन से दिन बड़े होने लगते हैं और प्रकृति में स्पष्ट परिवर्तन दिखाई देने लगता है।
ज्योतिषाचार्य आचार्य पवन पाठक के अनुसार, इस वर्ष सूर्यदेव दोपहर तीन बजकर सात मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। हालांकि, पुण्यकाल के लिए प्रातः आठ बजकर 43 मिनट से स्नान, दान एवं जप आदि का विशेष महत्व रहेगा।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों में कहा गया है 'यत् पिण्डे तत् ब्रह्मांडे' अर्थात् ब्रह्मांड में होने वाले परिवर्तन का प्रभाव मानव शरीर और जीवन पर भी पड़ता है। इसी कारण मकर संक्रांति को आध्यात्मिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी विशेष महत्व प्राप्त है। व्यापारियों के लिए विशेष उपाय बताते हुए आचार्य ने कहा कि रक्तचन्दन और श्वेत तिल मिलाकर ठंडे जल से स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करने से व्यापार में आने वाली बाधाओं से राहत मिल सकती है।
अनुराधा नक्षत्र में सूर्य प्रवेश, बनेगा ‘मंदाकिनी’ योग
इस वर्ष सूर्यदेव का मकर राशि में प्रवेश अनुराधा नक्षत्र में हो रहा है, जिससे ‘मंदाकिनी’ नामक संज्ञा योग बन रहा है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में शुभ फलदायी माना गया है। हालांकि, सूर्य का प्रवेश दिनमान के तृतीयांश में होने के कारण व्यापारी वर्ग को कुछ सावधानी बरतने की आवश्यकता बताई गई है।
शुभ कार्य दो फरवरी के बाद
आचार्य पवन पाठक ने बताया कि इस वर्ष शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण मांगलिक एवं शुभ कार्यों का आरंभ दो फरवरी से शुभ माना जाएगा।
स्नान-दान का विशेष महत्व
मकर संक्रांति के दिन नदियों में स्नान करना विशेष पुण्यदायक माना गया है। इसके साथ ही कंबल दान, घी का दान, तिल का दान अत्यंत शुभ फल प्रदान करता है। इस दिन षट्तिला एकादशी भी होने के कारण चावल एवं खिचड़ी का सेवन वर्जित रहेगा। तिल से बने पदार्थों का दान एवं भगवान विष्णु को श्वेत तिल अर्पित करना विशेष लाभकारी बताया गया है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।