एनजीटी ने चारधाम यात्रा की वहन क्षमता पर उत्तराखंड सरकार से मांगा जवाब, 21 जुलाई को अगली सुनवाई
एनजीटी ने उत्तराखंड सरकार पर चारधाम यात्रा की वहन क्षमता तय करने का दबाव बढ़ाया है। अगली सुनवाई 21 जुलाई को है। ...और पढ़ें

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समय कम है?
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जागरण संवाददाता, देहरादून। सामरिक और भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में संचालित चारधाम यात्रा की वहन क्षमता तय करने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तराखंड सरकार पर समयबद्ध कार्रवाई का दबाव बढ़ा दिया है।
प्रधान पीठ नई दिल्ली में बुधवार को हुई सुनवाई में अधिकरण ने स्पष्ट निर्देश दिया कि चारधाम यात्रा की कैरीइंग कैपेसिटी संबंधी मसौदा रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर विधिवत आवेदन के साथ प्रस्तुत की जाए।
अधिकरण ने माना कि सीमित भू-क्षेत्र, नाजुक पर्वतीय ढांचा, बार-बार भूस्खलन और संवेदनशील सीमा क्षेत्रों की वजह से चारधाम मार्गों पर यात्रियों की संख्या, यातायात दबाव और संसाधनों की क्षमता का वैज्ञानिक निर्धारण आवश्यक है। यही कारण है कि रिपोर्ट को लंबित रखने के बजाय शीघ्र निर्णय लेने को कहा गया है।
सरकार ने दो अप्रैल को दायर हलफनामे में बताया कि गत 24 मार्च को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक कर भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) की रिपोर्ट संबंधित विभागों को भेजने, जिलाधिकारियों के माध्यम से समाचार पत्रों में उसका सार प्रकाशित कराने व मंदिर समितियों, होटल संघों, परिवहन संगठनों तथा स्थानीय हितधारकों से सुझाव लेने का निर्णय लिया गया है।
छह माह की मांग पर सख्त टिप्पणी
सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि मसौदा रिपोर्ट तैयार की जा रही है और एक सप्ताह के भीतर दाखिल कर दी जाएगी। राज्य ने पूरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए छह माह का समय भी मांगा, लेकिन अधिकरण ने इसे असंगत बताते हुए अस्वीकार कर दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि चारधाम जैसे संवेदनशील क्षेत्र में लंबी समयसीमा उचित नहीं मानी जा सकती।
सीमा क्षेत्र, आपदा जोखिम और बढ़ती भीड़ बनी चुनौती
चारधाम यात्रा मार्ग उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जैसे उन जिलों से गुजरते हैं जो सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।
इन क्षेत्रों में सेना और सीमा सुरक्षा से जुड़े आवागमन के साथ तीर्थयात्रियों का दबाव बढ़ने से यातायात और आपदा प्रबंधन दोनों चुनौती बनते हैं। मानसून में भूस्खलन, बादल फटना और सड़क अवरोध जैसी घटनाएं स्थिति को और गंभीर बनाती हैं।
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एनजीटी ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले प्रगति रिपोर्ट दाखिल की जाए और परामर्श प्रक्रिया में आवेदक पक्ष को भी सुनवाई का अवसर दिया जाए। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की गई है।