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    उत्तराखंड में राहुल का चुनावी शंखनाद आज, पहुंचे देहरादून; भाजपा सरकार पर बोलेंगे हमला

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 03:06 PM (IST)

    राहुल गांधी आज उत्तराखंड में छात्रों और युवाओं से संवाद करेंगे, जिसका उद्देश्य भाजपा सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी को भुनाना है। ...और पढ़ें

    HighLights

    1. राहुल गांधी आज उत्तराखंड में छात्रों-युवाओं से करेंगे संवाद

    2. भाजपा सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी उभारने पर कांग्रेस का जोर

    3. पार्टी में एकजुटता और गुटबाजी खत्म करने पर भी रहेगा ध्यान

    जागरण संवाददाता, देहरादून। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को उत्तराखंड के अपने दूसरे दौरे में छात्रों एवं युवाओं के बीच होंगे। मतदाताओं का यह वर्ग मुखर तो रहता ही है, साथ में राजनीतिक दलों के लिए नैरेटिव तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    राहुल गांधी शुक्रवार दोपहर करीब ढाई बजे देहरादून एयरपोर्ट पहुंचे। जहां कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया।

    नीट व भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर केंद्र व राज्य की सत्ताधारी भाजपा के विरुद्ध एंटी इनकंबेंसी उभारने पर पार्टी का पूरा जोर है। राहुल शुक्रवार को यही करने जा रहे हैं। साथ में प्रदेश में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रस्तावित उनकी बैठक को पार्टी में एकजुटता और गुटबाजी व खींचतान को लेकर सख्त संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

    चु़नावी वर्ष में राहुल गांधी का दौरा

    उत्तराखंड में जीत का रास्ता तलाश करने के लिए कांग्रेस की रणनीति बड़ी जनसभाओं के स्थान पर मतदाताओं के विभिन्न वर्गों को साधने की है। राहुल गांधी स्वयं बीते माह जून में अल्मोड़ा में चुनावी सभा और पौड़ी में पूर्व सैनिकों को संबोधित कर इसकी शुरुआत कर चुके हैं।

    यद्यपि, चु़नावी वर्ष में बीते माह राहुल का दौरा मौसम की खराबी के कारण बाधित रहा था। अल्मोड़ा और पौड़ी में वह पहुंच नहीं सके थे, लेकिन उन्होंने मोबाइल फोन से ही इन सभाओं को संबोधित किया था। देहरादून में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक का उनका कार्यक्रम ही रद कर दिया गया था।

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    अब लगभग एक माह 10 दिन बाद शुक्रवार को राहुल के देहरादून दौरे को प्रदेश में कांग्रेस के लिए विधिवत चुनावी शंखनाद के रूप में देखा जा रहा है। मुख्य विपक्षी दल की रणनीति यही है कि राज्य में केंद्र और राज्य के भाजपा सरकारों के विरुद्ध एंटी इनकंबेंसी को उभारा जाए। दोनों सरकारों के डबल इंजन पर प्रदेश में मतदाताओं का भरोसा बरकरार रहना कांग्रेस को खटकता रहा है।

    क्षत्रपों को एकजुट करने पर जोर

    एक दिवसीय दौरे में राहुल प्रदेश में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करेंगे। उनका दौरा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और पार्टी में नई ऊर्जा का संचार करने के दृष्टिगत महत्वपूर्ण है ही, क्षत्रपों को एकजुट कर चुनाव की तैयारी तेज करने से जोड़कर इसे देखा जा रहा है। प्रदेश में कांग्रेस के पास मजबूत क्षत्रप तो हैं, लेकिन गुटीय खींचतान की जड़ें भी उतनी ही गहरी हैं।

    नौ माह से नई प्रदेश कार्यकारिणी का इंतजार

    राहुल की उपस्थिति में ही कांग्रेस के सामने यक्ष प्रश्न भी है। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में गणेश अध्यक्ष को नौ माह का समय हो चुका है, लेकिन अब तक नई प्रदेश कार्यकारिणी गठित नहीं हो सकी है। चुनावी वर्ष में संगठन की तैयारियों पर इसका असर पार्टी के भीतर ही महसूस किया जा रहा है। इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष रहे करन माहरा भी साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल में नई कार्यकारिणी के लिए तरस गए।

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