राज्यपाल ने शिक्षा में AI और तकनीकी कौशल पर दिया जोर, कोर विवि रुड़की ने प्रस्तुत की योजनाएं
राज्यपाल गुरमीत सिंह से कोर विश्वविद्यालय रुड़की की कुलपति प्रो. अनुभा सिंह ने भेंट कर एआइ व आधुनिक प्रौद्योगिकी पहलों पर प्रस्तुतीकरण दिया। राज्यपाल न ...और पढ़ें

राज्यपाल गुरमीत सिंह से कोर विश्वविद्यालय रुड़की की कुलपति प्रो. अनुभा सिंह ने भेंट की।ा
HighLights
राज्यपाल को एआइ व आधुनिक प्रौद्योगिकी पहलों पर प्रस्तुति दी गई।
शिक्षा में नवाचार, अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर।
विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं हेतु कौशल व तकनीकी दक्षता दें।
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) से सोमवार को लोक भवन में कोर विश्वविद्यालय रुड़की की कुलपति प्रो. अनुभा सिंह ने भेंट कर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) एवं आधुनिक प्रौद्योगिकी आधारित पहलों पर प्रस्तुतीकरण दिया। इस दौरान विवि की ओर से एआइ एवं टेक्नोलाजी के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों तथा भविष्य की योजनाओं की भी जानकारी साझा की गई।
आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर बल दिया
राज्यपाल ने शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर बल दिया। कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल एवं तकनीकी दक्षता से सुसज्जित करने के लिए निरंतर प्रयास करने चाहिए। इस अवसर पर कोर विवि के प्रतिकुलपति डॉ. राजेश कुमार उपस्थित रहे।
राज्यपाल से मिले वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) से सोमवार को लोक भवन में महर्षि पाणिनी संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन मध्यप्रदेश के कुलपति प्रो. शिव शंकर मिश्रा ने भेंट की। इस दौरान संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रसार से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, संस्कृति और सभ्यता की आधारशिला है।
यह भी पढ़ें- देहरादून में चेहलुम जुलूस आज, कई रूट पर डायवर्ट; चेक करें नया ट्रैफिक प्लान
आज एआई और आधुनिक तकनीक का युग
राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत हमारी अमूल्य धरोहर तथा ज्ञान का भंडार है, जिसे वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। राज्यपाल ने कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और आधुनिक तकनीक का युग है। ऐसे समय में संस्कृत के अध्ययन, शोध एवं प्रसार को तकनीक से जोड़कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि इसकी वैज्ञानिकता और समृद्ध ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल सके।