उत्तराखंड के जंगलों में आग बुझाने के लिए पेयजल लाइनों में लगेंगे हाइड्रेंट, बनेंगी नई फायर लाइनें
उत्तराखंड सरकार जंगलों की आग से निपटने के लिए पेयजल लाइनों में हाइड्रेंट लगाने और सड़कों के किनारे नई फायर लाइनें बनाने की योजना बना रही है। ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में जंगलों को आग से बचाने के लिए सरकार अब नवाचार पर विशेष जोर दे रही है। इस कड़ी में शहरी क्षेत्रों की भांति जंगलों से गुजर रही पेयजल लाइनों में हाइड्रेंट लगाए जाएंगे, ताकि किसी भी क्षेत्र में आग लगने पर उसे बुझाने के लिए पानी उपलब्ध हो सके।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने मंगलवार को मुख्य वन संरक्षक वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन को इसकी कार्ययोजना निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही जंगलों से गुजरने वाली सड़कों को उपयोग में लाते हुए इनके दोनों ओर नई फायर लाइनें बनाई जाएंगी।
बनाई जाएंगी नई फायर लाइनें
पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में हर साल ही आग रूपी आपदा में बड़े पैमाने पर वन संपदा स्वाह हो रही है। इस वर्ष ही 15 फरवरी से अब तक जंगलों में आग की 394 घटनाओं में 331.12 हेक्टेयर वन क्षेत्र झुलस चुका है। पांच जिले तो आग के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं।
आग की चुनौती से निबटने को सरकार ने अब जंगलों से गुजरने वाली पेयजल लाइनों में हाइड्रेंट लगाने की योजना बनाई है। मुख्य वन संरक्षक वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन सुशांत पटनायक के अनुसार पेयजल योजनाओं के बारे में जल संस्थान और पेयजल निगम से जानकारी ली जा रही है। फिर जंगलों से गुजरने वाली पेयजल लाइनों पर हाइड्रेंट लगाने की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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बनेंगी नई फायर लाइनें
अग्नि नियंत्रण में फायर लाइनें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। राज्य के जंगलों में 13085.03 किलोमीटर फायर लाइनें हैं। ये एक प्रकार के चौड़े रास्ते हैं, जिन्हें साफ रखकर आग को एक से दूसरी तरफ जाने से रोका जाता है। 1000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कई जगह इनमें पेड़ उग आए हैं।
यद्यपि, इनके कटान की अनुमति मिल गई है, लेकिन अब इसका विकल्प भी तलाशा जा रहा है। जिन जंगलों में ऐसी फायर लाइनें हैं और वहां से सड़कें गुजर रही हैं, तो उनका भी उपयोग विभाग करेगा। सड़क के दोनों तरफ नई फायर लाइनें बनेंगी।
क्या है हाइड्रेंट
पेयजल लाइनों में हाइड्रेंट ऐसा सक्रिय संपर्क बिंदु या वाल्व है, जिसके माध्यम से दमकलकर्मी आग बुझाने के लिए लाइन से सीधे उच्च दबाव वाला पानी प्राप्त करते हैं। जंगलों में हाइड्रेंट लगने पर वनकर्मी भी दमकलकर्मियों की भांति इससे पाइप जोड़कर पानी का छिड़काव कर सकते हैैं।
आग की दृष्टि से अति संवेदनशील जिले
अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, नैनीताल, पौड़ी, टिहरी व उत्तरकाशी
इस वर्ष आग की घटनाएं
- क्षेत्र, घटनाएं, प्रभावित क्षेत्र
- गढ़वाल, 285, 241.32
- कुमाऊं, 74, 64.05
- वन्यजीव परिरक्षण, 35, 25.75
- (नोट: घटनाएं संख्या और क्षेत्र हेक्टेयर में)
जंगलों को आग से बचाने के लिए सरकार गंभीरता से जुटी है। इसके लिए तमाम नवाचार भी किए जा रहे हैं। जंगलों में पेयजल लाइनों पर हाइड्रेंट लगाने की योजना इसी कड़ी का हिस्सा है। - सुबोध उनियाल, वन मंत्री
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