श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन: चातुर्मास में संत करेंगे देशव्यापी जनसंवाद, हरिद्वार से तैयार हुई रूपरेखा
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन को चातुर्मास के दौरान देशव्यापी स्वरूप दिया जाएगा। संत देशभर में जनसंवाद कर ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर ...और पढ़ें

श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज श्रीमहंत हरी गिरी महाराज व अन्य संत।जागरण आर्काइव
HighLights
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय स्वरूप
चातुर्मास में संत देशभर में चलाएंगे जनसंवाद अभियान
ऐतिहासिक तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया पर होगी चर्चा
शैलेंद्र गोदियाल, हरिद्वार। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय सनातन जनआंदोलन का स्वरूप देने की तैयारी शुरू हो गई है।
चातुर्मास के चार महीनों में देशभर के संत अपने-अपने प्रवास क्षेत्रों में रहकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पक्ष पर जनसंवाद चलाएंगे।
यह जनसंवाद कार सेवा अभियान के बाद शुरू होगा। हरिद्वार से लेकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों के प्रमुख के प्रमुख धार्मिक नगरों और जिलों में संतों, श्रद्धालुओं, धर्माचार्यों और स्थानीय नागरिकों से संवाद कर उन्हें अभियान से जोड़ा जाएगा।
इस कार्यक्रम को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डा. रविंद्रपुरी महाराज (निरंजनी) ने रूपरेखा तैयार कर दी है।
श्रीमहंत डा. रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि यह मसला मंदिर के साथ सनातन आस्था, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक न्याय से जुड़ा राष्ट्रीय सनातनी विषय है।
29 जुलाई गुरु पूर्णिमा से प्रारंभ होकर 24 नवंबर कार्तिक पूर्णिमा तक चलने वाले चातुर्मास के दौरान अधिकांश संत एक ही स्थान पर निवास करते हैं।
इसी अवधि को जनजागरण के लिए सबसे उपयुक्त मानते हुए अखाड़ों और संत समाज ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि विषय को प्रमुख अभियान बनाने का निर्णय लिया है। इस दौरान संत अपने आश्रमों, मंदिरों और प्रवास क्षेत्रों में प्रतिदिन श्रद्धालुओं से संवाद करेंगे।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों, न्यायालय में चल रहे प्रकरणों और आंदोलन की पृष्ठभूमि की जानकारी देंगे। अभियान के तहत धार्मिक सभाएं, सत्संग, प्रवचन, विचार गोष्ठियां और साहित्य वितरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
श्रीमहंत डा. रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि का विषय देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए इसे समाज के प्रत्येक वर्ग तक शांतिपूर्ण और वैचारिक तरीके से पहुंचाया जाएगा।
अभियान में युवाओं, महिलाओं और सामाजिक संगठनों की भी सहभागिता सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई गई है। हरिद्वार, प्रयागराज, अयोध्या, काशी, उज्जैन, नासिक, दिल्ली और अन्य प्रमुख धार्मिक केंद्रों में रहने वाले संत अपने-अपने क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान चलाएंगे।
श्रद्धालुओं से नियमित संवाद कर उन्हें श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों, धार्मिक मान्यताओं और वर्तमान न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।
अभियान का उद्देश्य समाज में इस विषय को लेकर जागरूकता बढ़ाने और व्यापक स्तर पर जनसमर्थन तैयार करने का है। श्रीमहंत डा. रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि चातुर्मास के दौरान होने वाले संवाद, सत्संग और धार्मिक आयोजनों की रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी।